- मानसून सत्र में पदोन्नति में आरक्षण बिल पास कराने को लेकर संघर्ष समिति ने बनाई रणनीति, दलित सांसदों से सम्पर्क के लिये 5 टीमें गठित
- संघर्ष समिति ने भाजपा सरकार को बताया आरक्षण विरोधी
संघर्ष समिति पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल लोकसभा से पास कराने को लेकर लम्बे समय से संघर्षरत आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र ने केन्द्र की मोदी सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार बाबा साहब के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाकर पूरे देश के दलित समाज को गुमराह कर रही है। 2 दिन पूर्व शुरू हुए लोकसभा के मानसून सत्र के एजेण्डे में पदोन्नति बिल का न होना इस बात को दर्शाता है कि केन्द्र की मोदी सरकार पूरी तरह आरक्षण विरोधी है।
यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि 6 माह से ज्यादा व्यतीत हो गया लेकिन लोकसभा की 30 सदस्यीय संसदीय कमेटी की रिर्पोट जिसमें पदोन्नति बिल अविलम्ब पास करने की संस्तुति की गयी थी, को केन्द्र की मोदी सरकार पूरी तरह दरकिनार कर देश में दलित कार्मिकों का उत्पीड़न करा रही है। बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था के तहत दलित कार्मिकों को मिलने वाले अधिकार पर लगातार भाजपा सरकार कुठाराघात कर रही है और सबसे दुख की बात यह है कि देश के लगभग 137 दलित सांसद चुपचाप तमाशा देख रहे हैं।
आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार व अन्जनी कुमार ने कहा कि संघर्ष समिति की 5 अलग-अलग टीमें दिल्ली में पदोन्नति बिल पास कराने को लेकर दलित सांसदों के सम्पर्क में हैं। जरूरत पड़ी तो संघर्ष समिति का पूरा संयोजक मण्डल दिल्ली में डेरा डालेगा। अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में इसबार संघर्ष समिति अपना पूरा जोर लगा देगी कि सभी दलित सांसद एकजुट होकर पदोन्नति बिल पास कराने को लेकर लोकसभा व राज्यसभा में अपना पुरजोर योगदान दें, जिससे केन्द्र की मोदी सरकार को विवश होकर पदोन्नति में आरक्षण बिल पास करना पड़े।







