डॉ दिलीप अग्निहोत्री
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरणादायक रहा है। खासतौर पर विद्यर्थियो को उनसे बहुत कुछ सीखना चाहिए। वह ईमान वाले मुसलमान थे। भारतीय परिवेश के अनुकूल उदारवादी और सर्वधर्म सम्मान में यकीन करने वाले थे। उनको भगवत गीता कंठस्थ थी। उसके कर्म सिद्धांत पर उनका विश्वास था। गरीब परिवार में जन्में, लेकिन शिक्षा प्राप्त करने की जबरदस्त लगन थी। संघर्ष किया, उच्च शिक्षा प्राप्त की। महान वैज्ञानिक बने। उनके जीवन के इस अध्याय से विद्यार्थियो को सीखना चाहिए। विफलता के संबन्ध में भी उन्होंने गीता के आधार पर सकारात्मक विचार दिया।वह पायलेट की नौकरी प्राप्त करने में विफल हुए थे। जीवन से निराश थे। लेकिन उत्तरंखण्ड में एक सन्यासी के वाक्य को गांठ की तरह बांध लिया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति का इस बात पर अधिकार नहीं होता कि वह कहा जन्म लेगा। फिर जरूरी नहीं कि अन्य निर्णय मर्जी के हिसाब से हो। इसलिए विफलता में निराश न हों, इसे भी अवसर माने। उत्साह के साथ कर्म करते रहें। इन वाक्यों ने कलाम का जीवन बदल दिया। जो पायलेट नहीं बन सका, वह महान वैज्ञानिक बयँ गया। देश को मिसाइल की सौगात दी। पोखरण परमाणु विस्फोट में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
लखनऊ के एपीजे अब्दुल कलाम प्रावधिक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उनसे जुड़े प्रसंगों की चर्चा हुई।
कुलाधिपति राम नाईक ने बीटेक, बी.फार्मा, एमबीए, एमसीए, एमटेक, एम.फार्मा, पीएचडी सहित अन्य पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक व उपाधि प्रदान की। इस वर्ष प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा 61,619 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गयी। राम नाईक ने दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ. आरए माशेलकर अध्यक्ष ग्लोबल रिसर्च एलायंस को मानद् उपाधि एवं डाॅ. कलाम के सहयोगी सृजन पाल सिंह को ‘एलुम्यनाई अवार्ड’ देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मन, वचन एवं कर्म से जीवन पर्यन्त अपने को इस उपाधि के अनुरूप सिद्ध करते रहें। विद्यार्थी अपने माता-पिता एवं गुरूजनों का सदैव सम्मान करें जिन्होंने आपको आकाश में उड़ने के लिये पंखों में ताकत दी है।

जीवन में सफलता पाने के लिये प्रमाणिकता, गुणवत्ता एवं कठिन परिश्रम की आवश्यकता है। सूचना तकनीक ने विश्व की दूरियों को कम कर दिया है। वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा है। आगे बढ़ने में कभी असफलता मिले तो घबरायें नहीं बल्कि उसका कारण तलाशकर दोबारा प्रयास करें। विज्ञान के परिवर्तन को समझें और रोज नया ज्ञान सीखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि ‘शार्टकट’ से जीवन की प्रगति रूक सकती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गत चार वर्षों में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिये अनेक योजनाएं प्रारम्भ की हैं। इसी तरह से प्रदेश सरकार भी युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। प्रदेश में बिजली और कानून व्यवस्था में सुधार के कारण निवेशक यहाँ निवेश करने के लिये आकर्षित हुये हैं। उत्तर प्रदेश में ओद्यौगिक विकास का माहौल बना है। गत फरवरी में आयोजित इंवेस्टर्स समिट में रूपये 4.28 लाख करोड़ के निवेश के प्रस्ताव आये हैं। राज्य सरकार ने ‘एक जिला एक उत्पाद’ की योजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ प्रदेश के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पाद की ब्रांडिग की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास विकल्प है कि वे नौकरी करना चाहते हैं या स्वरोजगार शुरू करके नौकर देना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश में अब तक सम्पन्न 17 विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 8.28 लाख उपाधियाँ प्रदान की गयी हैं जिसमें 4.46 लाख उपाधियाँ छात्राओं को मिली हैं यानि 54 प्रतिशत। पिछले वर्ष छात्राओं को 51 प्रतिशत उपाधियाँ प्राप्त हुई थी। वास्तव में बेटियों के लिये इस वर्ष अब तक 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी बड़ी उपलब्धि है। डाॅ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में आज के दीक्षांत समारोह में 61,619 उपाधियों में से 47,492 उपाधियाँ अर्थात् 77 प्रतिशत उपाधियाँ छात्रों को एवं 14,127 उपाधियाँ अर्थात् 23 प्रतिशत उपाधियाँ छात्राओं को मिली हैं। इसी प्रकार कुल 67 पदकों में से 21 पदक अर्थात् 31 प्रतिशत पदक छात्रों को एवं 46 पदक अर्थात् 69 प्रतिशत पदक छात्राओं ने अर्जित किये हैं।
रामेश्वरम् के एक नाविक परिवार से संबंध रखने वाले डाॅ0 कलाम ने ज्ञान के आधार पर भारत के राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया। उनकी सादगी, मानवता एवं उदार मन अपने आप में एक आदर्श हैं। मानव के लिये कोई सीमा नहीं है।
आकांक्षाओं को संभव बनाये रखना चाहिए। मेहनत का हमेशा फल मिलता है। असंभव कहकर छोड़ देना आसान है पर जो प्रयास करते हैं वही विजयी होते हैं। हमेशा समाधान का हिस्सा बने न कि समस्याओं का। कड़ी मेहनत का कोई पर्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि मानवीय सफलता, कल्पना, मानवीय धैर्य की कोई सीमा नहीं होती है।







