देशभर में E20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर गुस्सा चरम पर है। आम गाड़ी मालिक परेशान हैं, प्रदर्शन हो रहे हैं, राजनीतिक दल विरोध जता रहे हैं, लेकिन सरकार अपने तर्कों पर अड़ी हुई है। अब इस मसले को और गरमा दिया है उत्तराखंड के मशहूर व्लॉगर सौरभ जोशी ने।
सौरभ जोशी का वायरल वीडियो
सौरभ जोशी, जिनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं, ने हाल ही में अपने व्लॉग में दावा किया कि उनकी मर्सिडीज कार का माइलेज पहले 16-17 km/l था, जो अब घटकर 9 और फिर मात्र 5 km/l रह गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “एथनॉल की वजह से गाड़ी खराब हो रही है, अब तो टैंक भरने से भी डर लगता है।”
https://x.com/news24tvchannel/status/2076259836241825824/video/1
वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। इससे पहले बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप ने भी इसी मुद्दे पर आवाज उठाई थी। दोनों के बयानों ने आम लोगों की नाराजगी को नई ताकत दी है।
जनता की शिकायतें
- कई कार मालिकों का कहना है कि माइलेज 10-30% तक घटी है।
- लग्जरी और पुरानी गाड़ियों में समस्या ज्यादा दिख रही है।
- मेंटेनेंस खर्च बढ़ने और इंजन डैमेज की आशंका जताई जा रही है।
- पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल (E0) का विकल्प लगभग खत्म हो गया है।
सरकार का पक्ष
सरकार और ऑटो कंपनियां कह रही हैं कि E20 BS-VI गाड़ियों के लिए सुरक्षित है। माइलेज में 3-6% की गिरावट सामान्य है, क्योंकि एथनॉल में ऊर्जा कम होती है। इसका मकसद तेल आयात घटाना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण कम करना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले ही “सबूत दो” कह चुके हैं।
https://x.com/i/status/2072743012443230607
सम्पादकीय टिप्पणी

एथनॉल ब्लेंडिंग एक अच्छा दीर्घकालिक लक्ष्य हो सकता है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त तैयारी और जनता की सहमति के थोपने से समस्याएं खड़ी हो रही हैं। जब आम आदमी और प्रभावशाली व्लॉगर्स दोनों अपनी गाड़ियों की हालत बयां कर रहे हैं, तो सरकार को “सुनने” से ज्यादा “समझने” की जरूरत है।
https://x.com/ArvindKejriwal/status/2076163441707094498/video/1
समाधान क्या हो सकता है?
- पुरानी गाड़ियों के लिए शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराना।
- स्वतंत्र जांच और वास्तविक डेटा जारी करना।
- माइलेज घाटे की भरपाई के लिए कुछ राहत (जैसे सब्सिडी या टैक्स में छूट)।
फिलहाल विवाद गरम है और हल का कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आ रहा। सरकार अगर जनता की आवाज को नजरअंदाज करती रही, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
गाड़ी मालिकों की परेशानी सिर्फ “माइलेज” की नहीं, बल्कि अपने पैसे और संपत्ति की सुरक्षा की है। समय आ गया है कि नीति और व्यवहार में संतुलन बिठाया जाए।






