बाबा नीब करौरी को शक्तिदेव हनुमान जी का अवतार माना जाता है। 17 वर्ष की अल्प आयु में ही बाबा को ज्ञान की प्राप्त हो गया था। संत हृदय-संत पुरुष लक्ष्मी नारायण शर्मा बाद में नीम करौली बाबा अथवा नीब करौरी बाबा के रूप में ख्याति प्राप्त हुये। शंकर दयाल शर्मा भी बाबा के आशीर्वाद से देश के राष्ट्रपति हुए।
बताते हैं कि बाबा नीब करौरी को दिव्य शक्तियां हासिल थीं। बाबा ने आशीर्वाद में जिसे जो कुछ दिया या कहा वह ब्रह्म वाक्य हो जाता था। बाबा का यह आशीर्वाद भक्त को निश्चित रूप से फलीभूत हुआ। हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रार्बट्स तो इतना अधिक प्रभावित हुयीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म को अंगीकार कर लिया।
बताते हैं कि हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया न तो ‘‘कैंची धाम’ आश्रम आयीं और न बाबा से मुलाकात हुयी लेकिन बाबा की छवि दर्शन से ही जूलिया उनकी अनन्य भक्त हो गयीं। फेसबुक के संस्थापक को सुझाव देने वाले एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स वर्ष 1974 में कैंची धाम आये थे लेकिन नीब करौरी बाबा के दर्शन नहीं हो सके। कारण सितम्बर 1973 में बाबा नीब करोरी ने शरीर त्याग दिया था लेकिन बाबा के आशीर्वाद व ‘‘कैंची धाम’ के दर्शन ने स्टीव जॉब्स की दशा-दिशा बदल दी।
स्टीव जाब्स इनलाइटेनमेंट (ज्ञानोदय) की खोज में भारत आये थे लेकिन उनको इनलाइटेनमेंट तो नहीं मिला लेकिन एप्पल का खाका अवश्य मिल गया। यहीं से लौट कर स्टीव जॉब्स ने एप्पल को मूर्तरूप दिया। अमेरिका के जैफ्री कैगेल ड्रग्स का शिकार हो चुके थे. अवसाद-(डिप्रेशन) के दौर से गुजर रहे दुनिया के मशहूर रॉक बैंड मास्टर जैफ्री कैगेल आखिरकार वर्ष 1970 न्यूयार्क से भारत आ गये। यहां उनकी मुलाकात नीब करौली बाबा से हुयी। इसके बाद तो उनकी दुनिया ही बदल गयी।
जैफ्री कैगेल रॉक बैंड छोड़ कर भजन-कीर्तन गाने लगे। बाद में जैफ्री ग्रैमी एवार्डस के लिए भी नामित हुए. उत्तर भारत में नीब करौरी बाबा चमत्कारी बाबा के रूप में भी जाने जाते रहे। बताते हैं कि बाबा नीब करौरी ने भले ही वर्ष 1973 में शरीर त्याग दिया हो लेकिन बाबा अभी भी अपने भक्तों-दीन-दुखियों को दर्शन देते रहते हैं।

इसे चमत्कार ही कहा जायेगा कि बाबा एक साथ दो स्थानों पर अवतरित हो जाते हैं। बाबा के चमत्कारों का कहीं कोई अंत नहीं रहा। बताते हैं कि एक बार बाबा ने पानी के पहाड़ पर घी के दीपक जलवा दिये। एक बार भण्डारा में घी कमी महसूस की गयी तो श्रद्धालुओं ने बाबा को अवगत कराया। उन्होंने नदी का जल कनस्तर (पीपा) में लाने को कहा। नदी का यह जल कड़ाही में जाते ही घी में तब्दील हो गया।

नैनीताल में ‘‘कैंची धाम आश्रम’ के अलावा बाबा ने देश में एक सौ आठ से अधिक मंदिर बनवाये या उनकी प्रेरणा से मंदिरों-आश्रमों का निर्माण हुआ. नैनीताल, ऋषिकेश, गुजरात, वृन्दावन, लखनऊ, शिमला व दिल्ली सहित देश के विभिन्न प्रांतों व शहरों में बाबा नीब करौरी के मंदिर व आश्रम स्थित हैं। यहां तक कि अमेरिका व जर्मनी सहित दुनिया के तमाम देशों में बाबा के मंदिर व आश्रम की एक लम्बी श्रंखला है।
नैनीताल स्थित बाबा नीब करौरी के कैंची धाम आश्रम में अमेरिका, फ्रांस, लंदन सहित दुनिया के तमाम देशों के भक्तों के आने-जाने का सिलसिला अनवरत बना रहता है. ‘‘कैंची धाम’ में हनुमान जी के अलावा कई अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। ‘‘कैंची धाम’ में बाबा नीब करौरी की प्रतिमा स्थापित है. प्रत्येक वर्ष 15 जून को ‘‘कैंची धाम’ स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन होता है। जिसमें देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं का आना जाना होता है। बाबा अधिसंख्य छवियों-चित्रों में कम्बल में दिखते हैं। शायद इसी से श्रद्धालु-भक्त ‘‘कैंची धाम’ में बाबा को कम्बल चढ़ाते हैं। विंध्यपर्वत श्रंखला में विंध्यांचल के अष्टभुजा पहाड़ी पर भी इस आध्यात्मिक गुरु का आश्रम है।







