मृत्युंजय दीक्षित
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर आयोजित की गयी विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिये आयोजित की गयी थी जो अब अयोध्या, बंगलुरू और नागपुर में बेहद शांतिपूर्वक संपन्न हो गयी है। विशाल धर्मसभा का शांति पूर्वक संपन्न हो जाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की एक बहुत बड़ी सफलता है। संतों की धर्मसभा से क्या भविष्य में मंदिर निर्माण का रास्ता निकल आया है यह तो आने वाले दो -तीन महीनों में तय होने जायेगा, लेकिन इससे उन ताकतों के मंसूबे पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं जो किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने की तैयारी कर रहे थे। देश के तथाकथित सेकुलर टी वी चैनल भी पूरे कार्यक्रम को अपने आकाओं के नजरिये से ही पेश कर रहे थे।
भाजपा व हिंदू विरोधी मानसिकता वाले सभी तथाकथित राजनैतिक दल केवल धर्मसभा के आयोजन मात्र से ही बेनकाब हो चुके हैं। सभी दलों में अपने परम्परागत मुस्लिम वोट बैंक को बचाने की मानसिकता उजागर हो गयी साथ ही उनका हिंदू समाज व मंदिरों के प्रति पे्रम का भी खुलासा हो गया। 6 दिसंबर 1992 के बाद अयोध्या की सुबह को लोग अपने तरीकों से याद कर रहे थे। बाजारों में अफवाहों का बाज़ार गर्म करके वातावरण को खराब करने के भरपूर प्रयास अराजक तत्वों की ओर से किये जा रहे थे लेकिन इस बार का प्रशासन अपने अलग ही रंगत में था। सोशल मीडिया पर लगातार पैनी निगाह रखी जा रही थी। पुलिस प्रशासन पूरी तरह से चुस्त रही।
अयोध्या की धर्मसभा शांतिपूर्वक निपट जाने के कारण बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल ने भी स्थानीय प्रशासन ,केंद्र व प्रदेश सरकर की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर समर्थकों की लाखों की भीड़ नियंत्रित करने में जैसी दृढ़ता का परिचय दिया गया वह स्वयं में मिसाल है। इससे साबित हुआ है कि सरकार कानून व्यवस्था के प्रति पूरी तरह से जिम्मेदार है। सरकार ने मोहम्मद इकबाल की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया था और रामनगरी के अल्पसंख्यक मुहल्लों को भी पूरी सुरक्षा प्रदान की गयी थी।

इस बार समाज विरोधी ताकतें हर प्रकार के प्रयास कर रही थीं कि जरा सी भी सूचना मिले व चूक हो जाये तो फिर उनका खेल आरभ हो जाये लेकिन वह सब मंसूबे धरे के धरे रह गये हैं। अगर शांतिपूर्वक आयोजनोें को दृष्टिगत रखा जाये तो आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह व मायावती की सरकारों से कही बेहतर माना जायेगा। आज समाज के सभी वर्गों के लोग शांति के साथ अपने धार्मिक, सामाजिक व राजनैतिक आयोजन कर रहे है। यह प्रदेश सरकार की अब तक की सबसे बड़ी सफलता है।
सभी हिंदू विरोधी दल सोच रहे थे कि जिस प्रकार से मुलायम सिंह यादव ने निहत्थे कारसेवकों पर निर्दयतापूर्वक बलप्रयोग किया था क्या उसी प्रकार फिर होगा ? क्या फिर पूरा प्रदेश दंगों के कारण कराह उठेगा और गली -गली में कफ्र्यू लगाना पडे़गा? योगी सरकार भीड़ पर नियंत्रण कैसे कर पायेगी या फिर साधु संतों ने आवेश व जोश में आकर यदि मंदिर निर्माण के लिये पत्थरों को रखना शुरू कर दिया तब क्या होगा ? कुछ टी. वी. चैनलों ने मुस्लिम समाज के पलायन की झूठी खबरें भी चलानी शुरू कर दीं। चैनल तो यहां तक दिखाने लगे थे कि भीड़ पूरी तरह से पागल और अनियंत्रित होती है वह लोग चटखारे दार व हंगामेदार ब्रेकिंग न्यूज चलाने के लिय तरसकर रह गये हैं।
इस बीच सभी विरोधी दलों ने अपने आप को बहुत बड़ा मुस्लिम पैरोकार बताने के लिये तरह- तरह की बयानबाजी शुरू कर दी जिससे उनके असली चेहरे बेनकाब हो गये। समाजवादी व परिवार तो अपने पुराने रंग से भी बेहद खतरनाक नजर आया। समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश की चुनावी जनसभाओं में रामभक्तों की तुलना धार्मिक नक्सलियों से करते हुए अयोध्या में तत्काल सेना लगाकर धर्मसभा कर रहे लोगों को वहां से हटाने की पुरजोर वकालत करते हुए अपने बाप मुलायम सिंह यादव से भी आगे जाते नजर आ गये। वहीे उनके चाचा शिवपाल यादव मार्च करते हुए राजभवन पहुंच गये और यह कहकर हंगामा करने लग गये कि जब वहां पर धारा 144 लागू है तो धर्मसभा का आयोजन क्यो हो रहा है ?
शिवपाल यादव ने एक कांग्रेसी नेता के बयान का ही सहारा लिया और कहा कि अयोध्या की जमीन विादित हो गयी है वहां पर मंदिर नहीं बनना चाहिये, इस प्रकार से समाजवादियों का रूख पूरी तरह से साफ है कि वह इस मामले में पूरी तरह से मुस्लिम समाज के साथ व बाबर के साथ ताल ठोककर खड़ी हुई है। बसपा सुप्रीमो मायवती ने तो अयोध्या विवाद को लेकर विगत विधानसभा चुनावों में एक पूरी बुकलेट जारी की थी। इन दलों के नेता व प्रवक्ता टी वी चैनलों पर पूरी तरह से हिंदू समाज विरोधी दोमुंही दोगलेपन की मानसिकता वाली बहस कर रहे थे।

अयोध्या सहित तीन शहरों में धर्मसभा का आयोजन करके विश्व हिंदू परिषद व तमाम सहयोगी संगठनांे ने अपनी पुरानी ताकत व जोश को फिर से प्राप्त करने में कुछ सीमा तक सफलता प्राप्त की है। जो लोग कह रहे थे कि संघ व विहिप कमजोर हो रहा है उनका भ्रम भी टूट गया है। विश्व हिंदू परिषद आज भी उसी प्रकार से ऊर्जावान व उमंग तथा उत्साह से भरा पड़ा है जैसा कि स्वर्गीय अशेक सिंघल जी के समय था। संतो ने यह भी बता दिया है कि अयोध्या मेें भव्य मंदिर निर्माण से पहले यह उनकी आखिरी धर्मसभा हेै और अब सीधे मंदिर निर्माण ही होगा। संतो के जोश व भारी जमावड़े को देखते हुए राजस्थान की चुनावी जनसभा में पीएम नरेंद्र मोदी को अयोध्या पर अपनी बात रखनी ही पड़ गयी और भरोसा दिलाना पड़ा कि वह अयोध्या विवाद को लटकाने के लिये कांग्रेस की साजिशों को सफल नहीं होने देंगे। जिससे यह संकेत मिला है कि अब विधानसभा चुनावों के परिणामों के आने के बाद बहुत जल्द कंेद्र सरकार अयोध्या पर फैसला लेने जा रही है।








3 Comments
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