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नई दिल्ली, 15 दिसम्बर 2018: कहते है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है इसका ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश में एक बार फिर देखने को मिला। बता दें कि लगभग 30 साल पहले कांग्रेस के नेता माधवराव सिंधिया प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते- बनते रह गए थे। और इतिहास ने उसे इस बार फिर दोहराया।
इस बार उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भी ऐसा ही हुआ और वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए। जनवरी 1989 में चुरहट लाटरी कांड के चलते अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन राजीव गांधी की इच्छा के बावजूद श्री सिंह के आलाकमान पर दबाव बनाये जाने के चलते पिता माधवराव सिंधिया तब मुख्यमंत्री नहीं बन सके थे।
अर्जुन सिंह समर्थक हरिवंश सिंह के भोपाल बंगले में श्री सिंह के समर्थक विधायकों का डेरा इसलिए डाल रखा था कि कांग्रेस के पर्यवेक्षक को को यह संदेश दिया जा सके कि विधायकों का बहुमत अर्जुन सिंह के साथ है। माधवराव सिंधिया पूरे भरोसे में थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है और वह दिल्ली से उड़ान भरकर भोपाल आ गए और 2 दिन तक भोपाल में ही रुके रहे, लेकिन अर्जुन सिंह के दबाव के कारण सिंधिया के स्थान पर मोतीलाल वोरा को मुख्यमंत्री बनाया गया।

और इस घटना के 29 साल बाद माधवराव के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बार प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनते- बनते रह गए और कमलनाथ देश के मध्य में स्थित सूबे में 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता संभालने जा रहे हैं।
कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सिंधिया ने कांग्रेस आलाकमान को ध्यान दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान ‘भाजपा का नारा माफ करो महाराज’ अपने तो शिवराज उनको (सिंधिया) निशाने पर रखकर ही दिया गया था। सूत्र ने मीडिया को बताया कि छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से 9 बार के सांसद नाथ को वरिष्ठता अनुभव और अधिक विधायकों के समर्थन के आधार पर मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया।
राजघराने के वंशज हैं सिंधिया:
ज्योतिरादित्य सिंधिया आजादी के पहले देश के मध्य भाग ग्वालियर के शाही मराठा सिंधिया राजघराने के वंशज हैं और उनकी दादी दिवंगत राजमाता सिंधिया जनसंघ के संस्थापक सदस्य सदस्यों मे थी। माधवराव सिंधिया भी अपनी माता के बाद 1971 में जन संघ में शामिल हो गए थे, और वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा लहर के बावजूद मां और पुत्र दोनों अपनी-अपनी सीटों पर विजयी हुए थे।
इसके बाद 1980 में माधवराव सिंधिया कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए काल के दौरान उनकी मां को जेल में बंद रखा था। वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे अपनी मां के पद चिन्हों पर चलते हुए बाद में भाजपा में शामिल हुई। और अब कांग्रेस विधायक दल के नेता कमलनाथ मध्य प्रदेश के 18 मुख्यमंत्री के रूप में 17 दिसंबर को शपथ लेने जा रहे हैं।






