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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कांग्रेस की अब सुप्रीम कोर्ट से खुनन्स

    By December 16, 2018 Current Issues No Comments12 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    कयास थे कि राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद कांग्रेस को शर्मिन्दी होगी। लेकिन राहुल गांधी की कांग्रेस इससे ऊपर उठ चुकी है। वह  खिसिया कर अब सुप्रीम कोर्ट से  ही खुनन्स निकालने लगी है। पहले से ही प्रत्येक कदम पर उसका झूठ उजागर होता रहा है। न्यायिक निर्णय उसी का अंतिम सोपान था। उसने इस मुद्दे का चुनावी स्वाद चख लिया है। इस हांडी को वह लोकसभा चुनाव में भी चढ़ाना चाहती है। इसलिए अब संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग हो रही है।
    यह सही है कि मनमोहन सिंह सरकार के समय हुए देश के सबसे बड़े घोटाले के लिए संयुक्त संसदीय समिति बनाई गई थी। लेकिन इसका गठन विपक्षी हंगामे से नहीं हुआ था। इसे तो कांग्रेस की सरकार ने नकार दिया था। उसे संयुक्त संसदीय समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद करना पड़ा था। इसके अलावा वह घोटाले लेखा महानिरीक्षक की रिपोर्ट से उजागर हुए थे। राफेल पर तो केवल राहुल गांधी ही हंगामा कर रहे थे। तथ्यों के आधार पर फ्रांस के प्रमुख ऑडिट विभाग, कम्पनी और सरकार सभी ने राहुल को झूठा बताया था। राहुल पूर्व राष्ट्रपति ओलांदे का बयान ले आये, इस पर भी उनका झूठ पकड़ा गया। क्योकि यह बयान यूपीए सरकार के समय का था।
    राहुल गांधी ने राफेल पर जो मुद्दे उठाए थे, उनपर सुप्रीम कोर्ट का नजरिया बिल्कुल स्पष्ट है। उसने इसमें कोई घोटाला नहीं माना, मतलब राहुल झूठ बोल रहे थे, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को उचित माना, इस पर भी राहुल झूठ बोल रहे थे। विमानों की कीमत, तुलनात्मक विवरण, खरीद प्रक्रिया की जो जानकारी सप्रीम कोर्ट ने मांगी, सरकार ने उसे सीलबंद लिफाफे में पहुंचा दिया था। कांग्रेस का यह आरोप सुप्रीम कोर्ट का निरादर है कि उसने पूरी जानकारी प्राप्त किये बिना फैसला सुनाया है। महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट पर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कैग की रिपोर्ट अभी संसद या लोकलेखा समिति के पास नहीं पहुंची है तो कुछ दिन में पहुंच जाएगी। यह सामान्य नियम के तहत हो जाएगा। इससे भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया था।
     केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें  राफेल विमान सौदे पर  फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है, जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति के बारे में संदर्भ है।  कैग और पीएसी से जुड़े मुहरबंद दस्तावेज के मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। सरकार ने अपनी तरफ से कोई तथ्य छिपाए नहीं है।
     कांग्रेस समझ चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस मामले में कोई दम नहीं बची है। अब उन्हें हंगामे पर ही भरोसा है। इसके लिए अनिल अंबानी के नाम को उछाल रहे है। जबकि अनिल अंबानी ने बहुत पहले ही राहुल गांधी को चुनौती दी थी। उनके पत्र का राहुल ने कोई जबाब नहीं दिया है। उन्होंने मोदी सरकार पर अनिल अंबानी की कंपनी को हजारों करोड़ रुपए का फायदा पहुंचाने का भी आरोप लगाया था। लेकिन अब इस मुद्दे पर बिजनेसमैन अनिल अंबानी ने राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया है। अनिल अंबानी ने अपने पत्र में कहा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्वियों ने कांग्रेस को गलत जानकारी देकर गुमराह करने की कोशिश की है।
    राफेल लड़ाकू विमान का निर्माण रिलायंस या दसॉ रिलायंस के संयुक्त उद्यम द्वारा नहीं किया जा रहा बल्कि सभी छतीस विमानों का शतप्रतिशत निर्माण फ्रांस में किया जाएगा। उसके बाद फ्रांस से उनका भारत को निर्यात किया जाएगा। अनिल अंबानी ने कहा कि बताया जा रहा कि रक्षा मंत्रालय ने रिलायंस समूह की कंपनी को छतीस राफेल विमानों का कॉन्ट्रेक्ट दिया है, जबकि ऐसा नहीं है। यह गलत बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसके बाद रिलायंस को हजारों करोड़ का फायदा होने जा रहा है जबकि यह सिर्फ कोरी अफवाह है। उन्होंने कहा कि हमारा भारत सरकार के साथ कोई भी कॉन्ट्रेक्ट नहीं होने जा रहा है। रिलायंस समूह ने दिसंबर दो हजार चौदह जनवरी दो हजार पन्द्रह में ही इसकी घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा कि फरवरी दो हजार पन्द्रह में ही हमने बस भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों को बता दिया था कि हमने कंपनी का गठन कर लिया है।
    राफेल पर राहुल गांधी ने अपनी विश्वसनीयता और भाषा की मर्यादा दोनों को रसातल में पहुंचा दिया है। चुनाव को  हारने के बाद दुबारा जा सकता है। लेकिन यदि एक बार विश्वास पर संकट आ जाता है, तो उससे मुक्त होना असंभव होता है। राहुल और उनके सहयोगी आज इसी मुकाम पर पहुंच गए है। लेकिन खिसिया कर अब ये सुप्रीम कोर्ट से खुन्नस निकल रहे है।
    सुप्रीम कोर्ट का राफेल पर निर्णय बहुत स्पष्ट है। इससे संबंधित कोई भी बिंदु छोड़ा नहीं गया। यदि कांग्रेस के नेता अपने झूठ को स्वीकार कर लेते तो शायद इनका प्रायश्चित हो जाता। यह लगता कि महात्मा गांधी की कुछ प्रेरणा बची है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय राहुल गांधी  मल्लिकार्जुन खड़गे आदि ने नए सिरे से दुस्साहस का प्रदर्शन किया। न्यायिक निर्णय की मनमानी व्यख्या की गई, मनमाने निष्कर्ष निकाले गए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी राहुल गांधी की भाषा पर कोई असर नहीं हुआ। वह जिस प्रकार का भाषण विधानसभा चुनाव प्रचार में दे रहे थे, उसी अंदाज में मीडिया से मुखातिब हुए। कहा कि चौकीदार चोर  है।
    पत्रकार वार्ता में  राहुल गांधी के साथ पी चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़के भी थे। वैसे दूसरों को चोर कहने वाले राहुल खुद नेशनल हेराल्ड मामले में पेरोल पर है, चिदम्बरम और उनके पुत्र कार्ति चिदम्बरम गंभीर आर्थिक घोटले में जांच का सामना कर रहे है, राफेल में तो कोई तथ्य भी नहीं है। फिर भी राहुल प्रधानमंत्री को चोर बताने लगे। पता नहीं बोफोर्स के समय अपने घर में उनकी भाषा शैली कैसी रही होगी। राहुल गांधी ने कहा कि राफेल डील पर प्रधानमंत्री मोदी सवालों का जवाब नहीं देते, आज तक प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई प्रेस वार्ता नहीं की है। यह बहुत अच्छा है कि नरेंद्र मोदी राहुल के ऐसे सवालों का जबाब नहीं देते।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि राफेल विमान की कीमत की जानकारी लेखा महानिरीक्षक की रिपोर्ट में दी गई है। वह समिति के सामने पेश की गई है। राहुल गांधी ने कहा कि संसदीय समिति के चेयरमैन मल्लिकार्जन खड़गे हैं और उनके सामने यह रिपोर्ट आई ही नहीं है।
    विश्वसनीयता का जो स्तर राहुल ने बना लिया है, खड़गे भी उससे ऊपर नहीं है। प्रमाण के रूप में खड़गे का बयान भी देखा जा सकता है। उनका कहना है कि राफेल विमान सौदे में मूल्य निर्धारण के बारे में कुछ नहीं बोला।  यह तो एक जनहित याचिका थी। इसका हमसे कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा कि हम इसे संसद में उठा रहे हैं जो देश की सर्वोच्च संस्था है।  उन्होंने ने कहा कि सरकार को संसद को यह बताना चाहिए कि वह इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति क्यों नहीं बनाना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट तो सिर्फ उन्हीं मुद्दों की जांच करेगा जो याचिका में उठाये गये हैं। वहीं जेपीसी मुद्दे की व्यापक जांच करेगी।  सारी फाइलों पर गौर किया जाएगा।पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं।  उन्होंने कहा, हमने पहले ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट राफेल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता क्योंकि नियमों के तहत उसका दायरा सीमित है।
    राहुल गांधी से लेकर उनके प्रवक्ता तक सभी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को महत्वहीन और गलत बताने पर लगे है। वह बताना चाहते है कि इस विषय पर केवल वही सत्यवादी है , बाकी सभी लोग झूठे है। सरकार के बाद इनका सीधा आरोप सुप्रीम कोर्ट पर ही है। राहुल और खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले  पर विचार नहीं किया। उसने मूल्य पर विचार नहीं किया।
    मतलब कांग्रेस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बिना गहराई में जाकर निर्णय दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट का कहना अलग है। विद्वान न्यायधीशों ने कहा कि उन्होंने प्रत्येक बिंदु पर गहराई से विचार किया है। इसमें मूल्य और खरीद प्रक्रिया के विषय भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में स्थिति स्पष्ट की गई। बिंदु नम्बर छब्बीस में विद्वान न्यायधीशों ने कहा कि हमने मूल्य विवरण पर गहराई से विचार किया। तुलनात्मक अध्ययन किया। बेसिक और बाद में लगाई गई सामग्रियों ,आर एफ पी और आई गई ए को देखा। गहन परीक्षण किया। लेकिन राहुल और खड़गे न्यायधीशों की इस टिपण्णी को भी झुठला रहे है। ईवीएम पर संवैधानिक संस्था निर्वाचन आयोग के बाद कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी कर रही है।
    सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कांग्रेस द्वारा की गई दूसरी हास्यस्पद टिप्पणी देखिये। खड़गे बोले कि यह तो निजी पीआईएल पर निर्णय था। मतलब कोर्ट याचिका दायर करने वाले को देख कर निर्णय करता है। प्रशांत भूषण और उनकी मंडली ने राफेल पर याचिका दायर की तो अलग निर्णय होगा, राहुल गांधी और खड़गे उसी विषय पर याचिका देंगे तो सुप्रीम कोर्ट अलग निर्णय देगा। ऐसी टिप्पणियों से कांग्रेस के दिग्गज अपनी स्थिति हास्यस्पद बना रहे है।
    प्रशांत भूषण ने वही विषय याचिका में उठाये थे जो राहुल गांधी देश विदेश में उठा रहे थे। कांग्रेस के कहने का मतलब यह है कि न्यायधीशों ने मामले को ठीक से समझे बिना निर्णय दे दिया। अब जेपीसी बने तो राहुल गांधी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, जैसे लोग राफेल की गहराई में उतरेंगे। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर विचार करके सरकार को क्लीन चिट दी है। सुप्रीम कोर्ट ने डील की जांच की मांग संबंधी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसकी पूरी प्रक्रिया में कोई संदेहास्पद पहलू नहीं है। विपक्ष में इस डील में घोटाले को मुद्दा बनाकर कई दिनों तक संसद की कार्रवी ठप रखी तो कई बार प्रधानमंत्री का इस्तीफा तक मांग चुकी है। हालांकि प्रधानमंत्री सहित केंद्र सरकार के तमाम मंत्री और भाजपा के बड़े नेता इस डील में घोटाले की आशंका को नकारते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की फैसले के बाद केंद्र सरकार को इस डील पर बड़ी राहत मिली है।
     केंद्र सरकार का दावा है कि इस समझौते में फ्रांस द्वारा मांगी जाने वाली मूल कीमत में तीन हजार करोड़ से ज्यादा  यूरो की बचत की गई है। इस समझौते में पचास प्रतिशत का एक ऑफसेट नियम भी लगाया गया था। इसके तहत फ्रांस, समझौते की मूल कीमत  के तीस प्रतिशत  हिस्से को भारत के मिलिट्री एयरोनॉटिकल्स संबंधी रिसर्च कार्यक्रमों में निवेश करेगा। कुल कीमत का बीस प्रतिशत फ्रांस, भारत में राफेल कल-पुर्जों के उत्पादन में निवेश करेगा। मतलब इसके कलपुर्जे भारत में ही बनेंगे। समझौते के तहत फ्रांस, भारत को कल-पुर्जों के साथ उन्नत श्रेणी की मीटिओर और स्कैल्प मिसाइलें भी देगा। इन्हें दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइलों में गिना जाता है। चीन और पाकिस्तान के पास भी इतने अत्याधुनिक हथियार नहीं है और न ही इन हथियारों का कोई तोड़ मौजूद है।
    इस झूठे अभियान से कांग्रेस ने  देश में निवेश और मेक इन इंडिया को भी नुकसान पहुंचाने का भी जाने अनजाने प्रयास किया है। राफेल जेट विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने कहा कि वह मेक इन इंडिया को भारत में स्थापित करने के लिए समर्पित है। रिलायंस जॉइंट वेंचर और एक पूर्ण आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क के माध्यम से दसॉल्ट एविएशन भारत में सफल उत्पादन सुनिश्चित करेगा।
    सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कांग्रेस पर तमाचा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल विमान सौदे में कोई संदेह नहीं है। इसकी गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं है। इसलिए इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज किया जाता है।
    चीफ जस्टिस ने कहा कि राफेल विमान हमारे देश की जरूरत है। ऑफसेट पार्टनर की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। किसी व्यक्ति के लिए निजी धारणा के आधार पर डिफेंस डील को निशाने पर नहीं लिया जा सकता है। मतलब साफ है। न्यायिक निर्णय के अनुसार राफेल पर आरोप को केवल धारणा माना गया है।
    विद्वान न्यायधीशों ने कहा कि सबूत नहीं मिले,इसलिए जांच का आदेश नहीं दे सकते। सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया में संदेह नहीं है। कीमतों को गोपनीय रखना जरूरी है।  किसी को लाभ पहुंचाने के सबूत नहीं है। अमित शाह ने ठीक कहा कि  राहुल गांधी ने देश के साथ खिलवाड़ किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सौदे को बदनाम करने के लिए काम कर रहे लोगों की मंशा पर सवाल खड़े किए गए हैं जो देश के लिए महत्वपूर्ण है।  अब राहुल बताएं कि उन्हें ऐसी जानकारी कहां से मिल रही है। जवाब दें कि वह किस आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहे थे।  उनके आरोपों के बारे में जानकारी का स्रोत कौन था। देश की आजादी के बाद से एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह करने का इससे बड़ा प्रयास कभी नहीं हुआ।
    राहुल गांधी पर बचकानी हरकत करने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने और अपनी पार्टी के तत्काल फायदे के लिए झूठ का सहारा लेकर चलने की एक नई राजनीति की शुरुआत की है।
    और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने आज सिद्ध कर दिया है कि झूठ के पैर नहीं होते और अंत में जीत सत्य की ही होती है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी गैर-जिम्मेदाराना आचरण की हद पार कर गए हैं। रविशंकर प्रसाद  ने कहा कि राहुल गांधी के राफेल डील पर दिए जा रहे बयानों की प्रशंसा पाकिस्तान में हो रही है। इसका कारण है कि चीन और पाकिस्तान भारत की शक्ति भी जानना चाहते हैं।

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