सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने एवं उनका सशक्तिकरण की नहीं बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दण्डित करने की: सुष्मिता देव
नई दिल्ली, 28 दिसम्बर 2018: मुस्लिम समाज में एक बार फिर तीन तलाक को रोकने के मकसद से लोकसभा में लाए गए मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2018 के कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए कांग्रेस ने इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की, तो सत्तारूढ़ बीजेपी ने ऐसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया।
इस मामले पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की सुष्मिता देव ने कहा कि उनकी पार्टी तीन तलाक़ बिल के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार के मुँह में राम बगल में छुरी वाले रुख के विरोध में है क्योंकि सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने एवं उनका सशक्तिकरण की नहीं बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दण्डित करने की है।

उन्होंने तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाने का विरोध करते हुए कि कांग्रेस 2017 के विधयेक को लेकर जो चिंता जताई थी उसका ध्यान नहीं रखा गया। सुष्मिता देव ने कहा कि एक वकील होने के बावजूद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक पर कानून बनाने को लेकर उच्चतम न्यायालय अल्पमत के फैसले का उल्लेख कहीं नहीं किया गया है कि तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखा जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 1986 में राजीव गांधी के समय शाहबानो प्रकरण के बाद बनाया गया कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का सबसे महत्वपूर्ण कानून था। जिसका उल्लेख उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में बार- बार किया। बीजेपी की मीनाक्षी लेखी ने विधेयक को नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि तीन तलाक को उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक बताया औरकहा कि इस प्रथा का कुरान में कहीं उल्लेख नहीं है।






