खास खोज : वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की कुछ ऐसी कोशिकाओं का पता लगाया है जो महिलाओं की बोन डेंसिटी (अस्थि की सघनता)को नियंत्रित करने में ‘‘चमत्कारिक’ भूमिका निभा सकती हैं
नई दिल्ली, 22 जनवरी 2019: अगर आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो अपने बोन हेल्थ को लेकर विशेषतौर से सतर्क रहने की जरूरत है। समय-समय पर इसकी जांच भी करानी जरूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व (बोन डेनसिटी) प्रभावित होने लगता है। लेकिन अब खुशखबरी है वह यह कि वैज्ञानिकों ने इसका इलाज ढूंढ निकाला है।
बता दें कि वैज्ञानिकों के एक बेहद अहम अनुसंधान में महिलाओं में बढ़ती उम्र में हड्डियों को कमजोर और भुरभुरा करने वाला रोग ‘ऑस्टियोपोरिसिस’ से निजात ही संभव नहीं है बल्कि उसे और मजबूत बनाने में ‘चमत्कारी’ सफलता भी मिल सकेगी।
मीडिया ख़बरों के अनुसार विज्ञान पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस ’ में प्रकाशित ताजा शोध में दो विविद्यालयों -यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस ऐेंजेलिस (यूसीएलए) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को (यूसीएसएफ) के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने मस्तिष्क की कुछ ऐसी कोशिकाओं का पता लगाया है जो महिलाओं की बोन डेंसिटी (अस्थि की सघनता) को नियंत्रित करने में ‘चमत्कारिक’ भूमिका निभा सकती हैं।
वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग के दौरान पाया कि मस्तिष्क की कुछ तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा प्रेषित किये जाने वाले विशेष सिग्नल को जब बंद कर दिया गया, खास करके चुहियों की, तो हड्डियां आश्चर्यजनक रूप से मजबूत होने लगीं। वैज्ञानिक अपने ताजा अध्ययन से इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि महिलाओं की हड्डियों को बुढ़ापे में भी मजबूत रखा जा सकता है।
वरिष्ठ शोधकर्ता यूसीएसएफ के सेलुलर एडं मलिक्यूलर फार्माकोग्नॉसी विभाग के वाइस चांसलर एवं प्रोफेसर होली इंग्राम ने कहा, हमने महिलाओं और कमजोर हड्डियों वाले अन्य लोगों के लिए एक ऐसी नयी खोज इजात की है जिससे उनकी हड्डियों को और मजबूत बनाया जा सकता है। सह शोधकर्ता यूसीएलए के इंटीग्रेटिव बायोलॉजी एंड फिजियोलॉजी विभाग की अस्सिटेंट प्रोफेसर सेटफाइन कोरेया ने कहा, हमने अपने पूर्व के शोध में पाया था कि हाइपोथैलेमस, जो पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करने समेत कई शरीरिक कायरें को नियंत्रित करने में मदद करता है, के न्यूरॉन्स में प्रोटीन ग्राही एस्ट्रोजन के अनुवांशिक रूप से खत्म होने पर चुहिया मोटी हो गयी।
ऑस्टियोपोरिसिस के लक्षण:
- हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
- मामूली चोट से फ्रैक्चर हो जाना
- जोड़ों में दर्द
- खड़े होने व सीधे बैठने में कठिनाई
- सुबह के समय कमर में दर्द होना
- हड्डियों का पतला हो जाना
- पीठ और गर्दन में पीड़ा
- समय के साथ लगभग 6 इंच तक लम्बाई कम होना
ऐसे करें बचाव ऑस्टियोपोरिसिस से:
- हड्डियों की सूजन को कम करके उनके घनत्व को बढ़ाता है। इसलिए रोजाना सेब का सेवन करें।
- नारियल का तेल एंटीऑक्सीडेंट यौगिक हड्डियों के ढांचे को सुरक्षित रखता है। इसलिए नारियल के तेल को अपने आहार में शामिल करें।
- बादाम का दूध में कैल्शियम की उच्च मात्रा पायी जाती है। यह ऑस्टियोपोरोसिस का बेहद अच्छा उपचार है। रोज एक गिलास बादाम वाला दूध नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
- तिल के बीज को भोजन में शामिल करने से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। इसमें कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है।
खास बातें
- पुरुषों के मुकाबले इस रोग से महिलाएं अधिक पीड़ित होती हैं।
- अनुवांशिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है।
- थायरॉइड या हारमोन की अधिकता से भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
- प्रोटीन, विटामिन डी और कैलशियम की कमी भी इस बीमारी को बढ़ावा देता है।
- बढ़ती उम्र और नींद की गोली या हार्मोनल दवाओं के कारण भी इस बीमारी के चपेट में आने की आशंका होती है।
- समय से पहले ही मासिक धर्म बंद हो जाने से भी इस रोग को बढ़ावा मिलता है।







