- मध्याॅंचल कम्पनी के वकील व उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष में लम्बी बहस
- नियामक आयोग का बडा फैसला: लेसा 1 अप्रैल 2018 के बाद अब तक सभी इस प्रकार की कार्यवाही जिसमें उपभोक्ता के खिलाफ धारा 126 अथवा 135 के तहत की गयी कार्यवाही पर 4 हफ्ते में दे पूरी रिपोर्ट आयोग सैम्पल के तौर पर उपभोक्ता उत्पीडन की करेगा तहकीकात
लखनऊ, 05 मार्च 2019: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये कानून के तहत राजाजीपुरम् में एक उपभोक्ता बृजेश मिश्रा द्वारा अपने भार की परिधि में कराए जा रहे निर्माण कार्य पर उन्हें लेसा अभियन्ताओं द्वारा गलत तरीके से विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 126 के तहत फंसाये जाने पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर सुओ मोटो याचिका के तहत आयोग द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत जारी नोटिस पर आज मध्याॅंचल विद्युत वितरण निगम के प्रबन्ध निदेशक श्री संजय गोयल, मुख्य अभियन्ता वाणिज्य, मध्याॅंचल श्री एके सिंह, अधिशाषी अभियन्ता राजाजीपुरम पेश हुये। उनके साथ पावर कारपोरेशन के वकील श्री अमरजीत सिंह राखरा भी उपस्थित थेे।

आयेाग सदस्य श्री एस के अग्रवाल एवं श्री के के शर्मा ने नियामक आयोग सचिव श्री संजय सिंह व निदेशक वितरण विकास चन्द्र अग्रवाल की उपस्थित में सुनवायी शुरू की। जोरदार बहस करते हुये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने क्रमवार पूरी घटना को विस्तार से बताते हुये आयोग के सामने पूरे साक्ष्य पेश किये और कहा कि यह घटना एक उदाहरण मात्र है। पूरे प्रदेश में बडे पैमाने पर उपभोक्ताओं का उत्पीडन हो रहा है। केवल लेसा में ही अनेकों मामलों में उपभोक्ता का उत्पीडन करते हुए टैरिफ की धारा 14 का उलंघन किया गया। जबकि उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वह अपने परिसर पर अपने भार की परिधि में निर्माण कार्य करा सकते है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा भले ही लेसा कहता है उपभोक्ता भगवान है लेकिन एक उपभोक्ता को न्याय दिलाने के लिये ऊर्जा मंत्री और आयोग को हस्तक्षेप करना पड रहा है। यह बेहद गंभीर है । इसलिये इस केस को नजीर मानकर की जाये कठोर कार्यवाही।
पावर कारपोरेशन की ओर से आयोग में उपस्थित उनके अधिवक्ता ने कहा कि उपभोक्ता परिषद की शिकायत अभी प्राप्त नही हुयी है और साथ ही जिस उपभोक्ता का मामला उपभोक्ता परिषद उठा रहा है उसके खिलाफ जो धारा 126 की कार्यवाही की गयी थी उसे निरस्त कर दिया गया है। इसलिये 142 की कार्यवाही न की जाये। और साथ ही उन्होने कहा कि टैरिफ की धारा को और क्लीयर किया जाना उचित होगा।
नियामक आयोग की पीठ में उपस्थित सदस्य एस के अग्रवाल व के के शर्मा ने भरी कोर्ट में यह फैसला सुनाया कि परिसर में निर्माण कार्य करा रहे उपभोक्ताओं के साथ उत्पीडन की बडे पैमाने पर शिकायतें आ रही हैं जो गंभीर मामला है। उपभोक्ता परिषद की शिकायत तो एक उदाहरण मात्र है। मध्याॅंचल विद्युत वितरण निगम 1 अप्रैल .2018 से अब तक लगभग 1 साल की लेसा के अन्तर्गत वह सभी रिपोर्ट 4 सप्ताह के अन्दर आयोग में दाखिल करे जिसमें लेसा द्वारा किसी भी विद्युत उपभोक्ता जो अपने परिसर में निर्माण कार्य करा रहा था और उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126 अथवा 135 के तहत कार्यवाही की गयी है।
बता दें कि आयेाग इस मामले का गंभीरता से ले रहा है और सेंम्पल के तौर पर यह चेक करायेगा कि उपभोक्ता का कोई उत्पीडन तो नही किया गया। क्यांेकि टैरिफ की धारा 14 में उपभोक्ता को अपने परिसर में भार की परिधि में निर्माण कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने उपभोक्ता परिषद की शिकायत को कारपोरेशन के वकील को भेजने का निर्देश देेते हुये कहा उस पर भी मध्याॅंचल दे पूरा जवाब। आयेाग पुनः पूरे मामले पर अप्रैल माह में सुनवायी करेगा।







