रटंत संस्कृति को दी मात, अभ्यर्थी बोले – “असली शिक्षक अब चमकेंगे”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2026 ने इस बार पारंपरिक रट्टा मार परीक्षा की छवि पूरी तरह बदल दी। समझ, विश्लेषण और व्यावहारिक शिक्षण कौशल पर जोर देने वाले प्रश्नपत्र ने प्रदेशभर के अभ्यर्थियों के दिल जीत लिए। साथ ही एआई की निगरानी और कड़ी सुरक्षा ने परीक्षा की विश्वसनीयता को नया आयाम दिया।
एआई ने पकड़े 44 फर्जी अभ्यर्थी
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी इस्तेमाल किया। तीन दिनों में कुल 44 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए, जिनमें शनिवार को 19 शामिल थे। ये दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने आए थे। इस सख्ती ने परीक्षा की निष्पक्षता को मजबूत संदेश दिया।
भारी उमड़-घुमड़, 88.77% उपस्थिति
प्रदेश के 60 जिलों में 955 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 19,94,661 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 17,70,714 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। कुल उपस्थिति 88.77 प्रतिशत रही। खास बात यह कि 1,85,791 सेवारत शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 31 अगस्त 2027 तक टीईटी पास करने की समयसीमा ने इस परीक्षा का महत्व और बढ़ा दिया है।
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया: ये रही असली परीक्षा
अभ्यर्थियों ने समझ आधारित प्रश्नपत्र की भरपूर सराहना की:रजत सिंह (रायबरेली):
- “केवल तथ्य याद करने की बजाय गहरी समझ और तार्किक सोच की परीक्षा ली गई।”
- ओम प्रकाश (गोंडा): “व्यावहारिक शिक्षण अनुभव पर जोर था। असली पढ़ाने वाले शिक्षकों को फायदा मिलेगा।”
- राकेश कुमार (प्रयागराज): “शिक्षक पात्रता परीक्षा का यही उद्देश्य होना चाहिए – रटंत नहीं, शिक्षण क्षमता का मूल्यांकन।”
- बसंत कुमार कनौजिया (लखनऊ): “समझ आधारित प्रश्नों से अनावश्यक दबाव बहुत कम लगा।”
सुल्तानपुर की ज्योति चौधरी ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया से अंग्रेजी विषय के अभ्यर्थियों को अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद जताई। वहीं गोरखपुर के राज कुमार ने सामाजिक विज्ञान को थोड़ा कठिन बताया, लेकिन कुल मिलाकर प्रश्नपत्र को संतुलित करार दिया।
सकारात्मक बदलाव की दिशा
अमेठी, अम्बेडकरनगर और अन्य जिलों के अभ्यर्थियों ने कहा कि इस बार का प्रश्नपत्र वास्तविक ज्ञान और शिक्षण क्षमता का निष्पक्ष मूल्यांकन करने में सक्षम साबित हुआ। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि जिनका इस बार चयन नहीं हो पाएगा, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं क्योंकि आगे विभागीय टीईटी और CTET जैसे अवसर भी उपलब्ध हैं।
यूपीटीईटी-2026 ने साबित कर दिया कि शिक्षक बनने की परीक्षा अब सिर्फ किताबी ज्ञान की नहीं, बल्कि समझ और कौशल की होनी चाहिए। यह बदलाव न सिर्फ अभ्यर्थियों को पसंद आया, बल्कि पूरे शिक्षक भर्ती तंत्र के लिए एक स्वस्थ मिसाल भी पेश करता है।







