यह चित्र है ब्लैक होल का। केंद्र में ब्लैक होल और उसके चारों ओर उसकी प्रबल गुरुत्वाकर्षण से मुड़ रहा प्रकाश। ब्लैक होल (श्याम विवर) बहुत अधिक भारी और बहुत अधिक घनत्व के होते हैं। यह ब्लैक होल हमारे सूरज से 6.5 अरब गुना अधिक भारी है। अपनी संहति के कारण ब्लैक होल का गुरुत्व प्रकाश तक को इनसे भागने नहीं देता, और इस लिए वह काला दिखाई देता है। तो इनको देखेंगे कैसे? इनकी उपस्थिति का आभास होता है जब आस-पास के तारों आदि को यह अपने गुरुत्वाकर्षण से अपने मे खींच कर लील जाता है। पदार्थ के तेज़ी से खींचे जाने की प्रक्रिया में विकिरण निकलता है।

वैज्ञानिक उस विकिरण को ‘देख’ पाते हैं और पता चल जाता है कि किस दिशा में ब्लैक होल होगा। यह एक चित्र पाने के लिए 8 दूरदर्शियों का उपयोग किया गया जिन्हें पहाड़ों, ज्वालामुखियों आदि पर रखा गया। आंकड़े इतने अधिक थे कि उन्हें ई मेल से नहीं भेजा जा सकता था। उन्हें हार्ड डिस्क में आठों स्थानों से एक स्थान पर भेज कर विश्लेषित -संश्लेषित किस गया। यह 4 करोड़ पौंड का प्रोजेक्ट था।
वैसे लगभग 40 वर्ष पूर्व अप्रेल के अंक में अमरीकी पत्रिका मरक्यूरी ने अपने आवरण पर एक पूरी तरह काला चित्र छापा और कहा कि यह ब्लैक होल का पहला चित्र था। लोगों को बाद में समझ में आया कि वह अंक 1 अप्रेल का था और यह एक मज़ाक था।







