मीरा: भक्तिरस से सिंचित कविता
कहते ग्रंथ सब प्रेम ही ईश्वर का सहारा है।
पर दुनिया को ढोंग पसंद प्रेम से गँवारा है।।
नफ़रत के राज में प्रेम यहाँ अपनों से हारा है।
प्रेम के चलते ही मीरा जी रहीं बेसहारा हैं।।
मीरा के दर्द और गीतों को तो जग ने सराहा है।
पर उनके अपनों ने उन्हें घर से निकाला है।।
यह कैसी रीति जग की जहाँ ईश्वर तो पूजा जाता है।
लेकिन वहीं उनके संबल को नफ़रत से तौला जाता है।।

– अलका शुक्ला







