पर्यावरण प्रदूषण के कारण हमारी प्राकृतिक संपदा का हो रहा है काफी नुकसान
लखनऊ, 24 अप्रैल 2019: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस पर “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन द कंट्रोल ऑफ ग्रीन हाउस गैसेस ऐट द सोर्स बी फिजिकल एंड केमिकल टेक्नोलॉजी” विषय पर दूसरे दिन विभिन्न विषय विशेषज्ञों के द्वारा व्याख्यान दिए गए, जिनमें से यूनिवर्सिटी ऑफ ल्विषविली यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका से आये हुए प्रो संजय कुमार श्रीवास्तव ने पर्यावरण प्रदूषण का हरियाली पर बढ़ता प्रभाव और उससे होने वाली दिल की बीमारियों पर विस्तृत लेक्चर दिया। मेजर जनरल अजय चतुर्वेदी ने अपने जल प्रदूषण को कैसे कंट्रोल करना है तथा देश में कैसे जल प्रदूषण काम हो इस पर व्याख्यान दिया।

CDRI लखनऊ से पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव जी ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को नई तकनीकों से रोकने के लिए अपने नए सिद्धांतो विज्ञान कार्टून के आधार पर बताया। पीपल, बरगद, पाकड़ जैसे भारतीय वृक्षों को लगाने की बेहद जरूरत है, जिनकी पत्तियों को कार्बन कण, प्लूटोएंट, पार्टिकुलेट मैटर, धूल के कणों को सोखने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे वायु प्रदूषण कम हो रहा है। अन्य पेड़ों में नीम, बेल, महुआ, जामुन शामिल हैं। आम, गूलर भी हमारे लिए अच्छे हैं। हमें मोटे पत्तों वाले पेड़ों की आवश्यकता होती है जो छाया प्रदान करते हैं और इस प्रकार शीतल का कारण बनते हैं।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में वृद्धि रेगिस्तान के प्रसार और कई जानवरों और पौधों के विलुप्त होने का कारण बनेगी जो हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक ने छोटे पेड़ के मेंढक को देसी एंटी स्लिपरी जूते और चप्पल के साथ मिला दिया है जो बड़े लोगों के लिए एक वरदान होगा जो कभी-कभी फिसलते हैं और मिमीजोर फ्रैक्चर होता है। उनकी कमजोर हड्डियों और अधिक उम्र के ऑपरेशन के कारण संभव नहीं है। इसी तरह शहद की मक्खियां खतरे में हैं और अगर खत्म हो गए तो भोजन की कमी के कारण इंसान 4 साल से ज्यादा जीवित नहीं रह पाएंगे। भूटान जैसे देशों का उदाहरण है कि बड़े पैमाने पर वनों की कटाई के कारण भूटान में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में पेड़ों द्वारा अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाता है। कोस्टा रिका। लैटिन अमेरिका के देश ने अपने वन क्षेत्र को 10 से 50% तक बढ़ा दिया है और इस प्रकार यह दुनिया का सबसे हरा-भरा और खुशहाल देश बन गया है।
प्रो संजय श्रीवास्तव पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गैस का उत्सर्जन स्वास्थ कैसे प्रभावित करते हैं। नेपाल से आये हुए प्रो M.L. शर्मा ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के पर्यावरण की स्थिति पर व्याख्यान दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से हमारी प्रकृति के प्राकृतिक संसाधन हो रहे नुकसान से प्राकृतिक संपदा का काफी नुकसान हो रहा है। जिसमें उन्होंने इको फ्रेंडली तकनीकी पर ध्यान देने को कहा जहां सामाजिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने की जरूरत है।
IIT धन्यवाद से आये प्रो DD पाठक जी ने ग्राफीन ऑक्साइड और उसके उसके कम्पोजिट को उत्प्रेरक की तरह से ऑर्गेनिंक कंपाउंड जैसे डाय ,ड्रग, एमिनो अमल की उपयोगिया पर प्रकाश डाला।







