डॉ दिलीप अग्निहोत्री
काशी, 27 अप्रैल 2019: प्रधानमंत्री का काशी में रोड शो और उसके एक दिन बाद नामांकन आकर्षण का विषय रहा। दोनों अवसरों के माध्यम से मोदी ने दो बड़े सन्देश दिए है। रोड शो में उमड़े जन सैलाब से उन्होंने यह दिखाया कि आमजन के लगाव उनके साथ है। यह प्रबंधन के द्वारा जुटाई गई भीड़ नहीं थी, बल्कि स्वतः स्फूर्त जन उत्साह था। यह बात लोगों की उमंग से प्रमाणित थी।
दूसरे दिन नरेंद्र मोदी ने नामांकन के माध्यम से राजग की एकजुटता का सन्देश दिया। यह सही है कि भाजपा पिछली बार भी अपनी दम पर सरकार बना सकती थी। लेकिन उसने गठबन्धन धर्म का पालन किया। अपने सहयोगी दलों को उचित सम्मान दिया। मोदीं के नामांकन में राजग घटकों के नेताओं ने काशी पहुंच कर उसी विश्वास का प्रदर्शन किया।

नामांकन में अमित शाह, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, योगी आदित्यनाथ जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं के अलावा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल, बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार, लोजपा नेता रामविलास पासवान और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल भी वाराणसी पहुंचे थे।
दूसरी ओर यूपीए है। पहले तो कई पार्टियों ने कांग्रेस के साथ चलने से इनकार कर दिया, जहां गठबन्धन हुआ वहां भी खींच तान और अविश्वास का आलम है।
इसके अलावा पहले दिन नरेंद्र मोदी काशी की जनता से मुखातिब थे, दूसरे दिन उन्होंने ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया। इसमें भी मोदी ने आस्था के अनुरूप उदाहरण दिया। कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठाया था, आपके प्रयत्न से हमें इक्कीसवीं सदी में भारत माँ को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। एक संकल्प भी दिया। कहा कि मैं चाहता हूं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मतदान पांच प्रतिशत ज़्यादा होना चाहिए।






