जम्मू कश्मीर के पुलवामा और बारामूला जिले में 2 मुठभेड़ों में शनिवार को सुरक्षाबलों ने सेना के जवान औरंगजेब की हत्या में शामिल एक आतंकवादी समेत चार आतंकवादियों को मार गिराया। यह सेना के ऑपरेशन ऑल आउट की एक बड़ी सफलता है। प्रवक्ता के अनुसार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में तड़के के साथ एक बयान में हिजबुल मुजाहिद्दीन के 3 आतंकवादी मारे गए जबकि बारामुला के शहर में एक आतंकवादी मारा गया। इस प्रकार 48 घंटे में कश्मीर में 10 आतंकवादी मारे गए जो एक बड़ी कामयाबी है।
बता दें की अभी बीते दो दिन पहले भी दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और शोपियां जिले में छह आतंकवादियों का मारा जाना सुरक्षा बलों की ऑलआउट ऑपरेशन की दृष्टि से बहुत बड़ी सफलता है। हालांकि इसमें हमारा एक जवान शहीद हुआ तथा एक आम नागरिक भी जान गवां बैठा। बावजूद इसके इस सफलता को कम नहीं किया जा सकता।
दोनों जगह तीन-तीन आतकवादी मारे गए। घेरेबंदी एवं नागरिकों को बाहर निकालते समय ही आतंकवादियों ने गोलीबारी आरंभ कर दी, जिससे पुलवामा में जवान शहीद हुए और नागरिक मारा गया। इसमें सबसे बड़ी बात जैश कमांडर और 15 लाख के इनामी खालिद भाई का मारा जाना है।

इस समय जैश की आतंकवादियों गतिविधियों का वह मुख्य नेतृत्वकर्ताओं में से एक था। आतंकवादी खालिद पिछले आठ साल से कश्मीर में सक्रिय था और कई बार वह सुरक्षा बलों की घेरेबंदी से निकल भागा था। जम्मू-कश्मीर में पिछले करीब तीन सालों से ऑपरेशन ऑलआउट चल रहा है।
बारामुला को सुरक्षा बलों ने आतंक मुक्त घोषित भी किया है। लेकिन पुलवामा, शोपियां अभी भी चुनौती बने हुए हैं। इस समय सुरक्षा बलों के ऑपरेशन का मुख्य फोकस ये दो जिले हैं। इसी पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसका बदला लेने के लिए भारतीय वायुसेना ने बालाकोट सहित पाक अधिकृत कश्मीर के दो स्थानों पर बमबारी करके जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह किया था।
जैश के प्रमुख मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद इनके आतंकवादियों के लिए सीमा पार से मदद पाना कठिन हो गया है। इसलिए सुरक्षा बल इसे अवसर मानकर जैश को घाटी से खत्म करने में लग गए हैं। उस दिशा में यह बड़ी सफलता है। वस्तुत: आम चुनाव के कारण हमारा ध्यान जम्मू कश्मीर में सुरक्षा कार्रवाई की ओर कम जा रहा है, अन्यथा इस बीच लगातार आतंकवादियों की सफाई हो रही है।
सुरक्षा बलों ने सुनिश्चित किया है कि नये आने वाले आतंकवादियों का जीवन ज्यादा लंबा न हो। जमायत-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर प्रतिबंध, अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई और केंद्र सरकार द्वारा स्थानीय राजनीतिक दलों की मांगों व विरोधों को अनसुनी कर देने के कारण सुरक्षा बलों को काफी मदद मिली है एवं उनका आत्मविास बढ़ा हुआ है। वे इस भाव से आतंकवाद पर टूट पड़े हैं कि अभी नहीं तो कभी नहीं।
सुरक्षा बलों द्वारा घाटी में ऑपरेशन ऑलआउट अभियान के तहत आतंकवादियों के सफाये को लेकर चलाये जा ऑपरेशन में हमारे भारतीय जवान औरंगजेब के आतंकी हत्यारे को ढेर कर आतंक के आकाओं को भारी चेतावनी दी है की अगर वह चुप नहीं बैठेंगे तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे।








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