इस बार बनारस के अस्सी घाट पर लैंड हुए फ्रांस के मोंसियर पियरे। पियरे साहब पेरिस के सबसे बड़े ‘परफ्यूम एक्सपर्ट’ (इत्र विशेषज्ञ) थे। उनका मानना था कि दुनिया की सबसे अच्छी खुशबू ‘चैनल नंबर 5’ है और वो अपनी नाक पर हमेशा एक सिल्क का रुमाल रखते थे ताकि ‘अनचाही गंध’ से बच सकें।
उनका मिशन था – बनारस की खुशबुओं का नक्शा बनाना (Mapping the Scents of Kashi)।
जैसे ही पियरे साहब गोदौलिया चौराहे पर उतरे, उनकी नाक का ‘सॉफ्टवेयर’ हिल गया। एक तरफ से ताज़ा कचौड़ी की हींग वाली खुशबू आ रही थी, दूसरी तरफ से गाय के गोबर की सोंधी महक, और तीसरी तरफ से किसी नाली का ‘क्लासिक’ बनारसी परफ्यूम।
पियरे ने अपनी डायरी में लिखा – पेरिस में खुशबू बोतल में होती है, बनारस में खुशबू हवा में युद्ध कर रही है। यहाँ ‘नाक’ का होना एक साहसिक काम है।
दोपहर को पियरे साहब एक ‘इत्र’ की पुरानी दुकान पर पहुँचे। उन्होंने दुकानदार से कहा – Give me something subtle, like a blooming jasmine in rain.
दुकानदार ने एक छोटी सी शीशी निकाली और एक बूंद पियरे के हाथ पर लगा दी। यह ‘मिट्टी का अत्तर’ था।
पियरे ने जैसे ही उसे सूंघा, वो अपनी सुध-बुध खो बैठे। उन्हें लगा जैस इस बार बनारस के अस्सी घाट पर लैंड हुए फ्रांस के मोंसियर पियरे। पियरे साहब पेरिस के सबसे बड़े ‘परफ्यूम एक्सपर्ट’ (इत्र विशेषज्ञ) थे। उनका मानना था कि दुनिया की सबसे अच्छी खुशबू ‘चैनल नंबर 5’ है और वो अपनी नाक पर हमेशा एक सिल्क का रुमाल रखते थे ताकि ‘अनचाही गंध’ से बच सकें।
उनका मिशन था – बनारस की खुशबुओं का नक्शा बनाना (Mapping the Scents of Kashi)।
जैसे ही पियरे साहब गोदौलिया चौराहे पर उतरे, उनकी नाक का ‘सॉफ्टवेयर’ हिल गया। एक तरफ से ताज़ा कचौड़ी की हींग वाली खुशबू आ रही थी, दूसरी तरफ से गाय के गोबर की सोंधी महक, और तीसरी तरफ से किसी नाली का ‘क्लासिक’ बनारसी परफ्यूम।
पियरे ने अपनी डायरी में लिखा— पेरिस में खुशबू बोतल में होती है, बनारस में खुशबू हवा में युद्ध कर रही है। यहाँ ‘नाक’ का होना एक साहसिक काम है।
दोपहर को पियरे साहब एक ‘इत्र’ की पुरानी दुकान पर पहुँचे। उन्होंने दुकानदार से कहा— Give me something subtle, like a blooming jasmine in rain.
दुकानदार ने एक छोटी सी शीशी निकाली और एक बूंद पियरे के हाथ पर लगा दी। यह ‘मिट्टी का अत्तर’ था।
पियरे ने जैसे ही उसे सूंघा, वो अपनी सुध-बुध खो बैठे। उन्हें लगा जैसे वो सीधे धरती माँ की गोद में सो रहे हैं। उन्होंने नोट लिखा – “अद्भुत! फ्रांस की लैब में हम केमिकल मिलाते हैं, और ये बनारसी लोग ‘बारिश की पहली बूंद’ को बोतल में बंद कर लेते हैं। मेरी पूरी डिग्री बेकार है!
असली धमाका तब हुआ जब पियरे ने ‘बनारसी पान’ आज़माने की सोची। दुकानदार ने पान में गुलकंद, पिपरमेंट और चूना लगाकर उन्हें दिया। पियरे ने जैसे ही पान चबाया, उनके फेफड़ों तक ठंडी हवा का झोंका गया। वो खुशी से झूमने लगे – Oh la la! This is not food, this is a perfume for the soul!
शाम को पियरे मणिकर्णिका घाट पर थे। वहाँ धुएं और जलती लकड़ियों की गंध थी। पियरे ने रुमाल हटा दिया। उन्होंने महसूस किया कि यहाँ की हवा में ‘वैराग्य’ की खुशबू है।
उन्होंने अपनी डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा: “पेरिस में हम शरीर को खुशबूदार बनाते हैं ताकि लोग हमें पसंद करें, बनारस में रूह को खुशबूदार बनाया जाता है ताकि ईश्वर हमें पसंद करे। यहाँ की सबसे बड़ी खुशबू ‘सत्य’ है।
पियरे ने अपना कीमती फ्रांसीसी परफ्यूम गंगा में बहा दिया और दुकानदार से एक ‘गुलकंद’ का डिब्बा खरीद लिया। उन्होंने पेरिस के अपने साथियों को मैसेज भेजा:
“मैं वापस नहीं आ रहा। पेरिस की सड़कों पर ‘फैशन’ है, पर बनारस की गलियों में ‘अहसास’ है। अब से मेरा ‘सिग्नेचर सेंट’ इत्र नहीं, ‘गंगा की मिट्टी’ होगा!
अगले दिन पियरे साहब कुर्ते पर चंदन का लेप लगाए घाट पर बैठे थे और हर आने-जाने वाले को सूंघकर बता रहे थे कि “भाई साहब! आपमें से कचौड़ी की खुशबू आ रही है, आप मोक्ष के करीब हैं। – अतुल जैन







