कांग्रेस की हार के कारण यूंही नहीं निहितार्थ हैं इसके पीछे भी कई वजह हैं, मसलन कमलनाथ और उनके मंत्री नोट कमाने में लगे थे, अशोक गहलोत पुत्र मोह में। गुजरात के जमीनी नेता शक्ति सिंह को बिहार में फंसा दिया। मध्यप्रदेश में सरकार के बावजूद कांग्रेस के पोलिंग एजेंट नहीं थे। कांग्रेसी नेता घर सोते थे और कार्यकर्ता से धूप में रगड़ने की उम्मीद रखते थे। छत्तीसगढ़ में प्रचंड बहुमत के नशे में कांग्रेस का जमीनी जोश खत्म था।
उत्तर प्रदेश में मैदान पर कार्यकर्ता था ही नहीं। गाज़ियाबाद जैसे स्थान के प्रत्याशी का सोशल मीडिया और कार्यकर्ता से कोई संवाद नहीं था।
केवल राहुल या प्रियंका से उम्मीद रखने वाले खुद चेहरा दिखा कर भाग गए। न बूथ पर थे न गली में।
इसके विपरीत एक संगठित, एक साल से नियोजित अभियान था। गाज़ियाबाद में बीजेपी का बाकायदा काल सेंटर था। कांग्रेस के पास राज्य स्तर पर भी ऐसी व्यवस्था नहीं थीं। उप्र व मप्र में कांग्रेस प्रत्याशी को 3 फीसदी से 33 फीसदी वोट ही मिले।
मत प्रतिशत बुरी तरह घटा है। हार के जमीनी अन्य कारण भी हैं। जिनमें पार्टी में गुटबन्दी, सही गठबंधन न होना और गठबंधन में अंतर्विरोध होना शामिल है। एक वात और दिग्गिराजा भोपाल में आखिरी 10 दिन में हार गए।
देशभर में आज मतगणना स्थल पर कांग्रेस के एजेंट से खाने की पूछने वाला कोई नहीं था। को जगह भा ज पा के लोगों ने खाना खिलाया। यह बानगी है नेताओं की आत्म मुग्धता की।
- पंकज चतुर्वेदी की वॉल से







