- समाज कल्याण मंत्री ने कहा कोर्ट के आदेशानुसार सरकार ने की है कार्यवाही, संघर्ष समिति की मांगों से सहमत नहीं
- समिति ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का जो निर्णय लिया है वह सविधान के खिलाफ है
लखनऊ,02 जुलाई 2019: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के वरिष्ठ संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, डा रामशब्द जैसवारा, अन्जनी कुमार ने आज प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा और उसके माध्यम से उप्र सरकार द्वारा 24 जून को 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के निर्णय के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया।
समिति के नेताओं ने कहा अनुसूचित जाति श्रेणी में किसी भी जाति को मिलाने का अधिकार केवल संसद को ही है। इसलिये इस पूरी असंवैधानिक परिपाटी से आने वाले समय में केवल दो वर्गों के बीच टकराव होगा और कुछ प्राप्त नहीं हो सकेगा।
संघर्ष समिति के नेताओं ने समाज कल्याण मंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लिये प्राविधानित आरक्षण कोटा को बिना बढ़ाए उप्र सरकार द्वारा 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है, जिससे दलित समाज का हक मारा जायेगा और दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों के बीच मन मुटाव होगा जो उचित नहीं है।
समिति के नेताओं ने अपने ज्ञापन के माध्यम से यह मांग उठायी। चूंकि इन 17 जातियों जनसंख्या लगभग 13.4 प्रतिशत है इसलिये जब तक अनुसूचित जाति के आरक्षण का कोटा 35 प्रतिशत न कर दिया जाये। इसमें इन 17 अति पिछड़ी जातियों को शामिल करना उचित नहीं होगा। आने वाले समय में सरकार द्वारा जिस प्रकार से कार्यवाही की गयी है उससे हमारे पिछड़े समाज की ये जातियां न तो पिछड़ी जाति का हक प्राप्त कर पायेंगी और न ही अनुसूचित जाति में शामिल हो पायेंगी।
प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री ने संघर्ष समिति के नेताओं से कहा सरकार ने कोर्ट के आदेशानुसार कार्यवाही की है, आपके ज्ञापन को उसी परिपेक्ष्य में देखेंगे। संघर्ष समिति की मांगों से हम सहमत नहीं।







