6 महीने में बच्चों के साथ दुष्कर्म की हुई 24 हज़ार घटनाएं जो बेहद ही शर्मनाक है
बच्चों के साथ दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है, उसने इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए एक जनहित याचिका दायर की है अदालत ने कहा कि पिछले 6 महीने में बच्चों के साथ रेप की 24 हज़ार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं जो झकझोर देने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने कहा कि 1 जनवरी से जून तक देशभर में बच्चों से दुष्कर्म की 24212 एफ आई आर दर्ज हुई हैं, इनमें से 11981 मामलों में जांच चल रही है जबकि 12231 केस में चार्जशीट पेश हो चुकी हैं लेकिन ट्रायल 6449 मामलों में ही शुरू हुआ है। इनमें भी सिर्फ़ 4 फ़ीसदी यानी 911 मामले का निपटारा हो पाया है।

बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट में संशोधन में मिलेगी राहत:
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून में संशोधन किया जाना काफी महत्त्वपूर्ण है। जिस ढंग से बाल यौनाचार की भयावह घटनाएं सामने आ रही हैं उनको देखते हुए कड़े कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पोर्न साइटों पर बच्चों के साथ यौनाचार के वीभत्स दृश्यों ने दुनिया भर में विकृतियां बढ़ाई हैं। भारत भी इसका शिकार हुआ है। ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं।
कुछ धनपतियों और प्रभावी लोगों द्वारा अपनी मानिसक कुंठा मिटाने के लिए बच्चों के साथ अजीबोगरीब तरीके के यौनाचार करने की बातें भी सामने आ रहीं हैं। बेचारा कमजोर बालक यौन उत्पीड़नों के सारे कष्टों को सहने के अलावा कर ही क्या सकता है। किंतु सरकार और समाज को तो इसके खिलाफ सामने आना ही होगा। वैसे तो पहले से इसके खिलाफ कानून हैं पर वे बदले यौन विकृति के माहौल में कमजोर पड़ रहे हैं।

इसलिए मोदी सरकार का बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून को कड़ा करने के लिए संशोधनों को मंजूरी दिया जाना सही दिशा में किया जा रहा प्रयास है। प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का गंभीर यौन उत्पीड़न करने वालों को मृत्युदंड और नाबालिगों के खिलाफ अन्य अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें बाल पोनरेग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सजा और जुर्माने का भी प्रावधान शामिल है। इसमें पोक्सो की 10 धाराओं को संशोधित किया गया है। इसे संसद की मंजूरी मिलनी शेष है।
कड़ा कानून ऐसे यौन अपराधियों के लिए भय निवारक की भूमिका निभाएगा। हालांकि केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। इसके साथ पुलिस एवं प्रशासन के साथ समाज को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बच्चों को किसी तरह फंसा कर लाया जाता है और इसमें कई जगह गिरोहों के सक्रिय होने की भी घटनाएं सामने आई हैं। पूरे समाज का दायित्व परेशानी में फंसे असुरक्षित बच्चों को बचाना और उनकी सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करना है। सभी को अपना दायित्व समझना होगा।
कहीं भी बच्चे यदि संदेहास्पद परिस्थितियों में दिखें तो पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। हमें भी कहीं बच्चे परेशानी में दिखाई पड़ें तो आगे आना चाहिए और पुलिस को सूचना देनी चाहिए। बच्चे देश के भविष्य हैं। इस भविष्य को अपनी यौन कुंठा के लिए उपयोग करने वाले और उनको इसमें सहयोग देने वाले समाज के दुश्मन हैं। असल में मनुष्य के रूप में ये सब राक्षस हैं। इनके साथ कुछ भी किया जाए वह कम है।
मुख्य न्यायाधीश ने जाहिर की चिंता:
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं कोर्ट ने सरकार को जो भी आंकड़े बताएं और कहा कि हम विशेष अदालतें तेज जांच और निर्धारित समय सीमा में ट्रायल इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग और संसाधन बढ़ाए जाने पर विचार करेंगे।- मुख्य न्यायाधीश







