संसद से तीन तलाक बिल पास: राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 वोट से दी मंजूरी
नई दिल्ली,31 जुलाई 2019: मुस्लिम महिलओं के लिए एक ही बार में तीन बार तलाक तलाक तलाक बोलकर उनकी जिंदगी तबाह करने वालों को रोकने वाला और इस कृत्य को अपराध बनाने वाला ऐतिहासिक विधेयक मंगलवार को राज्यसभा से भी पारित हो गया है। उच्च सदन में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 के पक्ष में 99 वोट से दी मंजूरी।
राज्यसभा में वोटिंग के दौरान फौरी तीन तलाक को अपराध बनाने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। विरोधी रुख वाले दलों- जेडीयू, बीएसपी, पीडीपी, टीआरएस, वाईएसआर, एडीएमके, टीडीपी के वोटिंग में हिस्सा न लेने से सरकार का इस विधेयक को पास कराना आसान हो गया। इससे पहले विधेयक को सिलेक्ट कमिटी में भेजने वाला विपक्ष का प्रस्ताव भी 100 के मुकाबले 84 वोटों से गिर गया।
अब विधेयक पर राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद यह कानून 21 फरवरी को जारी हुए अध्यादेश की जगह ले लेगा। इसमें प्रावधान है, मुस्लिम महिला को एक बार में तलाक-तलाक-तलाक कहना अपराध होगा और आरोपी को तीन साल तक कैद और जुर्माना, दोनों भुगतना पड़ सकता है।
करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई: नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है। सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है। इस ऐतिहासिक मौके पर वे सभी सांसदों का आभार व्यक्त करते हैं।
तीन तलाक विधेयक का पास होना महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। तुष्टीकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। मुझे इस बात का गर्व है कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक देने का गौरव हमारी सरकार को प्राप्त हुआ है।

महिला खुद शिकायत करेगी:
- मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून में यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से एक बार में तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी उद्घोषणा शून्य और अवैध होगी।
- यह अपराध संज्ञये (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं करा सकता है।
- कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शतरे के साथ।
- मजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद।
- तीन तलाक से पीड़ित महिला अपने पति से स्वयं और अपनी आश्रित संतानों के लिए निर्वाह भत्ता प्राप्त पाने की हकदार होगी।
पति जेल चला गया तो पत्नी का गुजारा भत्ता कौन देगा: कानून मंत्री
कानून मंत्री ने क्या कहा: विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का नाम लेते हुए कहा हिन्दू विवाह कानून उनकी पार्टी की सरकार ने पारित किया, जिसमें निर्धारित उम्र से पहले विवाह करने के आरोप में दो साल की सजा का प्रावधान किया गया है। क्या उस समय उसका विवाद किया जाना चाहिए था। कांग्रेस की तत्कालीन सरकार 1961 में दहेज के विरोध में कानून लायी थी। उस समय क्यों नहीं कहा गया कि पति जेल चला गया तो पत्नी का गुजारा भत्ता कौन देगा? उन्होंने सवाल किया इतने प्रगतिशील काम करने वाली कांग्रेस की सरकार के शाहबानो मामले में कदम कैसे डगमगा गए?
हम भी चाहते हैं कि विधेयक पारित हो और मुस्लिम महिलाओं को ताकत मिले: गुलाम नबी आजाद
हम महिलाओं के सशक्तीकरण चाहते हैं, चाहे वे किसी भी समाज की हों। हम यह भी चाहते हैं कि यह विधेयक पारित हो और मुस्लिम महिलाओं को ताकत मिले। इसी वजह से हमने सरकार के समक्ष दो अनुरोध रखे। एक तो इसे सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया जाए और दूसरे इसे क्रिमिनल न बनाया जाए। लेकिन सत्ता पक्ष ने दोनों ही अनुरोध ठुकरा दिए। इसलिए मजबूरन विपक्ष को इसके विरोध में मतदान करना पड़ रहा है।







