भारत विविधताओं का देश है। इसी के अनुरूप यहां लोक कलाओं में भी विविधता और सुंदरता है। दूर दराज के इलाकों में लोक कलाएं अपने में अनेक विशिष्टता समेटे हुए है। संस्कार भारती ने इनको संरक्षित करके दुनिया के सामने लाने का बीड़ा उठाया था। इसमें उल्लेखनीय सफलता मिली। अब तक नेपथ्य में रहीं लोक कलाएं विश्व के सामने आईं। इनको देख कर भारत की समृद्ध विरासत और धरोहर का अनुमान लगाया जा सकता है।
लखनऊ में संस्कार भारती ने तीन दिवसीय कला साधक संगम का आयोजन किया। यह कहा गया कि सोशल मीडिया के उपयोग से कलाओं का संरक्षण व संवर्धन किया जा सकता है। इसके माध्यम से देश के दूर दराज हिस्सों के कलाकारों को भी अपने साथ जोड़कर उन्हें उचित मंच एवं सम्मान प्रदान किया जा सकता है।

इस अवसर पर तीन दिनों तक संस्कार भारती की अखिल भारतीय साधारण सभा एवं प्रबंधकारिणी की बैठक भी हुई। इसी के साथ कलाओं के संरक्षण संवर्धन एवं कलाकारों के कल्याण पर चर्चा की गई। सोशल मीडिया के माध्यम से कलाकारों को जोड़ने, लोककलाओं को उचित मंच प्रदान करने एवं कला सम्बंधित साहित्यों के प्रकाशन समेत कई विषयों पर सहमति बनी। भीमबेटका, सरस्वती नदी की खोज करने वाले प्रख्यात पुरातत्ववेता डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर की जन्मशताब्दी वर्ष के मौके पर धरोहर यात्रा निकाले जाने की भी योजना बनाई गई।
सम्मलेन परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति की गई। आल्हा, फरुआहि नाच, कत्थक, नाटक आदि का मंचन किया गया। इनमें संस्कार भारती के संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी का भी मार्गदर्शन मिला।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री







