आज का साइंस जितनी तेजी के साथ उन्नति कर रहा है उतनी ही तेजी से साथ भविष्य में इससे होने वाले खतरों का भय भी लोगों में बढ़ने लगा है। जब हम इस भय की बात करतें हैं जिसमे से पहला भय तो यही है कि दुनिया भर के उद्योगों में रोबोटों का प्रयोग जिस तेजी के साथ बढ़ाता चला जा रहा है। इससे यही बात सामने निकल कर आ रही है कि यह सिलसिला अब थमने वाला नही है क्योंकि जिस तेजी से समाज के लोगों के मध्य जगरुखता के साथ साथ समय एवं कम से कम मेहनत करके काम को समाप्त करने की चाहत हम इंसानो में इस हद तक बढ़ती चली गयी कि आज लोगों की निर्भरता मशीनों पर बढ़ गयी है ऐसी हालात में वैज्ञानिकों का ध्यान इस समस्या की ओर जाना स्वाभाविक है। इससे निबटने के लिए विकल्प की आवश्यकता को महसूस किया जाने लगा।
इस दिशा में एक सीढ़ी और आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी कृत्रिम बुद्धि के प्रयोग कर इसे सुलझाने के प्रयास तेज करते हुए इसका उपयोग करना भी प्रारंभ कर दिया है। इसी कड़ी में 3डी प्रिंटिंग का कार्य आता है, जो ऐसी ही चीजों को कुछ ही मिनटों में बनाने में पूर्णतः सक्षम है, जिन्हें बनाने में हमे पहले हफ्तों का समय लग जाता था, आज उन्ही कार्यों को थ्री डी तकनीक के प्रयोग के बल पर किसी भी सपने जैसा लगने वाले कार्य को आसानी से साकार कर सकते हैं, मौजूदा समय मे इसका व्यावसायिक प्रयोग करना भी शुरू हो गया है। इस तरह की तकनीकें विकासीत होते हुए आज वर्तमान में उस चरण सीमा में पहुंच गई हैं, जहां इनका उपयोग औद्योगिक कार्यों में बड़े पैमाने पर होने लगा है और निकट भविष्य में इसके और भी जोर पकड़ने की संभावना बढ़ती चली जा रही है।

अब तो ऐसा भी माना जाने लगा है कि ये तीनों प्रकार की तकनीकें दुनिया की चौथी औद्योगिक क्रांति का मुख्य आधार बनने वाली है। यही एक बात हम लोगों में डर पैदा करने लगा है कि इससे समाज के अधिकांश लोगों के हाथों से काम तो छीन ही जायेगा साथ ही मनुष्यों पर निष्क्रिय हो कर शिथिल पड़ जाने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा, क्योंकि जो काम मनुष्य अपने हाथों से करते हैं, उसे अब मशीनें करने लगेंगी और इस सूरतेहाल लोगों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलेगी। इस तरह की विचारधारा सिर्फ हम और आप जनसाधारण तक ही सीमित नही है अपितु ऐसी राय हमारे देश और विदेश के कई विशेषज्ञों द्वारा जताई जाने लगी है।
न्यूयार्क दुनियां की मैकेंजी जैसी आर्थिक सलाहकार कंपनी (मैक्किंज़े एंड कंपनी एक वैश्विक प्रबंधन संबंधित परामर्शदाता फर्म है जो वरिष्ठ प्रबंधन से संबंधित मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करती है। मैक्किंज़े दुनिया की अग्रणी व्यापारों, सरकारों और संस्थाओं के लिए एक सलाहकार के रूप में कार्य करती है। ) का आकलन है कि चौथी औद्योगिक क्रांति के कारण विश्व के 40 देशों में 80 करोड़ से अधिक लोग बेरोजगारी के कगार पर जा पहुंचेंगे या कहें दुनिया की एक चौथाई आबादी बेरोजगार हो जाएगी। कुछ अर्थशास्त्रियों ने तो ऐसी दशा का पूर्वानुमान करते हुए अभी से यूनिवर्सल बेसिक इनकम की अवधारणा पर जोर देना शुरू कर दिया, जिससे यदि लोग बेरोजगार हों जाये तो भी वे अपना जीवनयापन आसानी से कर सकें।
हालांकि अभी सभी लोग इससे सहमत नहीं होंगे कि बेरोजगारी सचमुच में व्याप्त होगी। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना हैं कि चौथी औद्योगिक क्रांति काल मे बहुत सारे वर्तमान कौशल बेकार अवश्य हो जाएंगे, लेकिन नये कौशल की भी उतनी ही जरूरत पडे़गी ऐसी हालात में लोग उन्हें जल्द से जल्द सीखने का प्रयास भी करेंगे।
एशियाई विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इससे पृथक सोच रखते हैं। उनका मानना हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि चौथी औद्योगिक क्रांति के दौरान बेरोजगारी बढ़ने के स्थान पर बेरोजगारी की संख्या में और कमी आ जाए। साथ ही उनका यह भी कहना है कि ठीक ऐसी हालत कप्यूटर क्रांति के समय भी पैदा हुई थी और उसके बाद ऐसा ही संचार क्रांति के वक्त भी हुआ था। हमे एक लंबे समय से यह देखने को मिला कि प्रत्येक बार ऐसा शोर उठ खड़ा होता है कि अब रोजगार बहुत कम हो जाएंगे, जबकि हुआ ठीक इसके विपरीत।
हमारे यहां चौथी औद्योगिक क्रांति के पश्चात उत्पादन की लागत कम हो जाएगी और उत्पादन बढ़ेने से अर्थव्यवस्था का भी विस्तार होगा। जनसाधारण द्वारा हमेशा ऐसा ही सोचा समझा जाता है कि हम लोग जो काम कर रहे हैं, उसे अब मशीने करेंगी तो हम बेरोजगार हो जाएंगे हम से हमारा रोजगार छिन जाएगा और हम बेरोजगरी की अवस्था मे हमें भूखो मारने के लिए तैयार रहना होगा।
हां यह बात लग है कि बदलाव के वक्त व्यक्ति को एक झटका अवश्य लगेगा लेकिन उसके बाद हालात पहले से और भी अधिक अच्छे हो जाएंगे। इस तरह की, अवस्था में उसका का मुकाबला करने का सबसे अच्छा और कारगर तरीका शायद यही है कि लोगों को बहुत बडे़ पैमाने पर नए कौशल का प्रशिक्षण देने की व्यवस्थाएं की जाएं। इससे सीधी सी बात यह है कि जो देश अपने यहां ऐसी व्यवस्था को अच्छे तरीके लागू करने में सक्षम होंगे, वे इस बदलाव का फायदा भी उठाएंगे। ऐसे में समय के साथ साथ आगे बढ़ने की है न कि कीसे से डरने की नहीं।
– जी के चक्रवर्ती







