- कैंट विधान सभा सीट रीता बहुगुणा जोशी की और वे ही नहीं आयीं प्रचार में
उपेन्द्र नाथ राय
लखनऊ, 21 अक्टूबर 2019: किसी विधानसभा के उप चुनाव में 28 प्रतिशत तक मतदान होना लोगों में सत्ता के प्रति अरूचि को दर्शाता है। इस मामले को संज्ञान लेकर यदि प्रदेश भाजपा अभी से नहीं सुधरी तो उसके लिए यूपी विधान सभा चुनाव में घातक सिद्ध हो सकता है। लखनऊ के कैंट विधानसभा चुनाव में सबसे विचारणीय पहलु यह रहा कि यह सीट रीता बहुगुणा जोशी के लोकसभा चुनाव जीत जाने के कारण रिक्त हुई और वे खुद ही यहां अपने भाजपा उम्मीदवार के प्रचार में नहीं आयीं। इससे यहां काफी संख्या में रहने वाले उत्तराखंड के मतदाताओं में निराशा हुई। वे लोग भाजपा के मतदाता होते हुए भी बूथ तक नहीं पहुंचे। दूसरी विपक्ष भी अनमने ढंग से ही इस चुनाव में लगा रहा, जिससे मतदाताओं में कोई उत्साह नहीं दिख पाया।
इसके अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी शायद उप चुनाव में लगना अपनी तवहीनी जान पड़ा। इस कारण वे अपने संसदीय क्षेत्र रहते हुए भी इस चुनाव में खुद भागीदारी नहीं की। इससे कार्यकर्ता निरूत्साहित रहे। दूसरी तरफ विपक्ष का भी देखें तो वह पूरे उप चुनाव अनमने ढंग से ही लगा रहा। कोई भी विपक्ष का प्रमुख नेता (रामपुर में अखिलेश की सभा को छोड़कर) इस उप चुनाव में नहीं लगा। इस चुनाव में सबसे ज्यादा सक्रियता यूपी भाजपा की रही।
मुख्यमंत्री खुद सक्रिय रहे और योगी आदित्यनाथ की विधान सभा के होने वाले उप चुनाव क्षेत्रों में हर जगह उनकी सभा हुई। इस लिहाज से देखा जाय तो उनकी बातों में अब लोगों को सच्चाई नहीं झलक रही है। इसका भी नतीजा रहा कि लोग उनकी सभाओं के बावजूद आकर्षित नहीं हो पाये।







