राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर अनेक शहरों में वायु प्रदूषण का बढ़ना चिंता का विषय है। इस संबन्ध में दो तथ्यों पर ध्यान देना आवश्यक है, पहला यह कि इस समस्या से केवल सरकार ही नहीं निपट सकती, इसके लिए समाज का सहयोग भी अपरिहार्य है। सरकार को अपने स्तर से प्रयास करने है, इसी के साथ आमजन को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना है। दूसरा यह कि वायु प्रदूषण का संकट बढ़ने पर ही सजग होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लगातार जागरूक रहना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ओर ध्यान दिया है। उनका प्रयास है कि इस संकट से आम नागरिकों को ज्यादा मुसीबत का सामना न करना पड़े। इसी लिए बीडीओ कांफ्रेसिंग के माध्यम से संबंधित प्रशासनिक मशीनरी को निर्देश जारी किए है। उन्होंन स्वयं इस समस्या के समाधान हेतु किए जा रहे उपायों की समीक्षा की।

इस दौरान सभी मण्डलायुक्तों जिलाधिकारियों को समुचित निर्देश दिए। कहा कि पराली, कूड़ा जलाने, निर्माण कार्यों व जनरेटर से उतपन्न होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके मद्देनजर परिवहन, ट्रैफिक, गृह, नगर विकास, राजकीय निर्माण, खनन, फायर सेफ्टी, शिक्षा, कृषि, खाद्य एवं रसद, आवास विकास परिषद, प्रदूषण नियंत्रण सहित जिला प्रशासन को वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु सभी उपाय करने के निर्देश दिए गए। शहरों में कूड़े का उचित निस्तारण होना चाहिए। इसे जलाने पर रोक लगायी जाए। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कार्यवाई करनी चाहिए।मुख्यमंत्री का यह निर्देश सरकारी मशीनरी के लिए है। लेकिन आमजन की भी इसमें जबाबदेही है।
उन्हें भी निर्धारित स्थासन पर ही कूड़ा डालना चाहिए। निर्माणाधीन इकाइयों को वायु प्रदूषण रोकने के मानकों का पालन करना चाहिए। पराली न जलाने के प्रति किसानों को जागरूक बनाने की भी आवश्यकता है। यह समझना होगा कि पराली जलाने से जमीन की उत्पादकता पर कम होने लगती है। इसलिए पराली का प्रयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में करना चाहिए। सड़क निर्माण के कार्यों फिलहाल कम किये जायें, धूल न उड़े इसके लिए पानी का छिड़काव करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने डेंगू के प्रति भी चिंता व्यक्त की। कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। डेंगू से बचाव के लिए पूर्व में संचारी रोगों की रोकथाम के सम्बन्ध में चलाए गए अभियान की तर्ज पर पुनः अभियान चलाया जाए। इसके लिए लोगों को भी जागरूक बनाना चाहिए।इसके अलावा योगी ने धान क्रय केन्द्रों के संचालन की गहन समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। कहा कि किसानों को क्रय केन्द्रों पर धान बेचने में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए।
. डॉ दिलीप अग्निहोत्री







