9 दिसम्बर 2019 को देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पेश किया, इस बिल के अंतर्गत हमारे देश मे दूसरे देश से आये शरणार्थियों को मिलने वाली नागरिकता को लेकर नियमों में बदलाव किया जाना हैं। बता दें कि पेश किये गये इस बिल में नागरिकता संशोधन पात्रता -जन्म से, नागरिकता पंजीकरण से, प्राकृतिक रूप से नागरिकता, यदि कोई व्यक्ति जिस देश में रहता है वह देश भारत में मिल जाता है तो।

केंद्र सरकार का प्रस्तावित संशोधन लोकसभा में बहुमत से पारित हो गया है। और आज इस बिल के यानी कि 12 दिसंबर को यह विधेयक Citizenship Amendment Bill (CAB) बिल उच्च सदन में भी पारित हो गया है अब देश मे यह कानून बन जाने से मुख्यतः बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान जैसे देशों से भारत आए हिंदुओं के साथ सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाइयों समुदाय के लोगों को बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का रास्ता साफ हो गया है।

भारत के संविधान में वर्तमान समय में 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं जबकि मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थी। भारत का संविधान 29 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था जिसको 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू किया गया था।
वर्तमान में लेकिन इस बिल का आंतरिक विरोध परस्पर जारी है।







