महंगाई की मार झेलना आम लोगों के लिए वैसे भी काफी मुश्किल होता है। अब महंगाई के जो आंकड़े आए हैं वे आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना और भी मुश्किल बनाने वाले हैं। खुद सरकार ने जो आंकड़े पेश किए हैं उनके मुताबिक खुदरा महंगाई की दर 4.62 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह पिछले 16 महीने के दौरान सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची महंगाई है। जाहिर है कि अब आम लोगों के लिए बाजार उनकी पहुंच से दूर होता जा रहा है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल जारी है, इसका सीधा असर लोगों के घरों की रसोई पर पड़ रहा है।
अभी तक रिजर्व बैंक का अनुमान था कि खुदरा महंगाई की दर 4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है पर ताजा आंकड़ों में महंगाई इस अनुमान को भी पार कर 4.62 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो पिछले 16 महीनों का उच्च स्तर है। सब्जियों, चावल, दाल और अन्य खाद्य उत्पाद, फल, मांस, मछली, अंडे आदि की कीमतों में काफी तेजी है, जिसके असर से सभी वस्तुओं की सामान्य खरीदारी भी प्रभावित हुई है। सवाल है कि जब लोगों के सामने खाने-पीने की चीजें खरीदना ही मुश्किल हो रहा है तो वे बाजार से दूसरी अन्य चीजें खरीदने की सोचें भी कैसे।
चिंताजनक बात यह भी है कि आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने भी आने वाले महीनों में महंगाई की दर में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है। जहां तक सब्जियों की कीमतें बढ़ने की बात है तो इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इन महीनों के दौरान जो फसल तैयार हो जाती थी, उसमें इस बार कुछ देरी हुई है। फिर तो जाहिर है कि थोक बिक्री और फिर खुदरा कीमतों के मामले में निगरानी की अनदेखी व अव्यवस्था भी रही। सच तो यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊंची होने से वस्तुओं की ढुलाई का खर्च बढ़ा है। अतः केवल फसलों के तैयार होने में देरी को बढ़ती महंगाई से जोड़ना कई वास्तविक कारणों से मंह फेरना है।






