
स्वामी विवेकानन्द सांस्कृतिक एकता के पक्षधर थे। भारत की सांस्कृतिक विरासत पर वह गर्व करने का सन्देश देते थे। इसकी विविधता दर्शनीय रही है। प्रत्येक प्रदेश ही नहीं उनके भी विभिन्न क्षेत्रों की अलग अलग क्षेत्रीय विशेषता है।

हमारे यहां अनगिनत लोक कलाएं की जन्म जयंती पर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में सांस्कृतिक उत्साह भी दिखाई दिया। प्रतिदिन मुख्य समारोह स्थल के अलावा लखनऊ के कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इनमें दर्शकों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई। सांस्कृतिक रूप से लखनऊ में लघु भारत का दृश्य दिखाई दिया।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री







