जी के चक्रवर्ती
2019 से 2020 में पड़ी हाड़ कंपाउ सर्दी ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिये, और इस साल यह सबसे लंबी शीत लहर है। उत्तर भारत में इस समय जिस तरह की सर्दी पड़ रही है, वैसी सर्दी आज तक किसी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुयी थी। दिनांक 21जनवरी 2020 है लेकिन अभी जारी खतरनाक सर्दी से लगभग पूरा देश कंपकंपा गया है।
हमारे देश में पड़ने वाली ठंडक को मौसम विभाग ने बहुत अधिक ठंड और कड़ाके की ठंड तय करने के लिए कुछ पैमाने तय कर रखे हैं। जिसके अंतर्गत यदि दिन में अधिकतम तापमान, सामान्य तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे रहता है, तो ऐसे दिन को सर्द दिन कहते हैं। इसी तरह से यदि दिन का अधिकतम तापमान, सामान्य तापमान से 6.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक रहता है तो इसे बहुत अधिक सर्दी पड़ना कहते हैं। वहीं पर अधिकतम तापमान, सामान्य तापमान से 7 से 12 डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुँच जाता है तो इसे बहुत कड़ाके की ठंड पड़ना कहते हैं।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि इस बार दिल्ली में तो सर्दी ने पिछले 118 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ डाला। 28 दिसम्बर शनिवार दिन के सुबह दिल्ली के लोधी रोड इलाके का तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जिसके कारण इतनी जबरदस्त सर्दी पड़ी की लोग अपने-अपने घरों में दुबके पड़े रहने के लिए मजबूर हो गये थे, लेकिन लोगों को अपने रोजमर्रे के काम-काज के लिए बाहर निकलना पड़ा जिससे लोगों का बहुत बुरा हाल हुआ था वहीं उत्तर प्रदेश में ठंड की वजह से कई लोगों की जाने भी चली गयी।
आमतौर पर प्रत्येक वर्ष दिसंबर के आखिरी और जनवरी के पहले हफ्ते में अत्यधिक ठंड पड़ती है। इस दौरान कई इलाकों में तापमान 4 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाने से दिसंबर माह में 16 से 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान नहीं पहुंच पाता है उत्तर और उत्तरपूर्व भारत के लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस वर्ष कुछ अधिक ही सर्दी पड़ी। वैसे दिसंबर के अंतिम एवं जनवरी के पहले हफ्ते में ठंड का प्रकोप बड़ जाता है। इस माह देश के कई इलाकों के तापमान 4 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाते हैं। दिसंबर माह में 16 से 18 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान नहीं पहुंच पता है।
कुछ मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सभी के पीछे मौसम चक्र का बदलना मुख्य वजह है, इसलिए आगे आने वाले समय मे ऐसी अति की घटनाओं की संख्या के इजाफा होने संभावना है। यह बात हम लोगों को एक चेतावनी भी है कि हमें अपने नगरों, कस्बों, गांवों एवं स्थानीय निकायों को मौसम की अति से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है और इसकी पूर्व इसकी पूर्व तैयारियां न होने के कारण प्रत्येक बार मौसम हमारे यहां के बहुत गरीब तबके के लोगों और बेघर लोगों की जान तक ले डालता है। पर्यावरण दिन प्रति दिन बदलता चला जा रहा है, इसलिए हमें भी अपने रहन-सहन तौर-तरीके भी बदलना पड़ेगा।







