सुधीर चौधरी ने एडिटर्स गिल्ड पर किया हमला
नवेद शिकोह
टीवी पत्रकार और एंकर सुधीर चौधरी ने ज़ी न्यूज़ के डीएनए कार्यक्रम में शाहीबाग़ पर ग्रांउड जीरो रिपोर्ट पेश करने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सबसे बड़े संगठन एडिटर्स गिल्ड पर सवाल उठाये। उन्होंने एडीटर्स गिल्ड, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ तमाम पत्रकार संगठनों को घेरते हुए कहा कि शाहीन बाग में जिस तरह वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ व्यवहार हुआ ऐसे में क्या ऐसे संगठनों का चुप्पी साधना जायज है !
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले लाइव कवरेज कर रहे दीपक चौरसिया के साथ शाहीनबाग के कुछ प्रदर्ननकारियों ने धक्का मुक्की की थी। जिसे दीपक चौरसिया ने मॉब लीचिंग बताया था। इस घटना के दो दिन बाद
दिल्ली के शाहीनबाग की कवरेज करने गये न्यूजनेशन के दीपक चौरसिया और जी न्यूज़ के सुधीर चौधरी को वहां से भगा दिया गया। जिसके बाद दोनों पत्रकारों ने अपने-अपने चैनल्स और सोशल मीडिया पर वो फुटेज भी दिखाये जिसमें शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी इन पत्रकारों का अपमान करते हुए नारे लगा रहे है- गो बैक गोदी मीडिया.. गो बैक दलाल मीडिया..

मशहूर टीवी पत्रकार और एंकर सुधीर चौधरी को लगने लगा है कि उन जैसे देश के चंद पत्रकार अपनों मे ही बेगाने हो रहे हैं। उनकी बात के पीछे एक ये दर्द उभरने लगा है कि देश में मीडिया के हजारों संगठन है। कुछ काफी बडे और विश्वसनीय संगठन भी हैं। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया,आईएफडब्ल्यूजे और ख़ासकर एडिटर्स गिल्ड पर सुधीर चौधरी सहित तमाम बड़े पत्रकारों की नाराजगी नजर आ रही है। आरोप है कि ऐसे तमाम संगठनों को एक खास विचारधारा के पत्रकारों का दर्द-दुख और समस्याएं ज़रूर सुनाई पड़ती है, किंतु कई मामलों में ये कानों में तेल डालकर बहरे हो जाते हैं। आंख बंद कर लेते हैं ताकि कड़वा सच दिखाई ना दे।
सुधीर चौधरी को ही नहीं दीपक चौरसिया, अरनब गोस्वामी और अमीश देवगन जैसे दर्जन भर नामचीन पत्रकारों का एक दर्द बार-बार उभर कर आता है कि जब उनके साथ कुछ गलत होता है तो खासकर टीवी मीडिया का सबसे बड़ा संगठन एडिटर गिल्ड क्यों खामोश रहता है।

जबकि राजदीप सरदेसाई जैसे किसी पत्रकार के बारे में कोई ट्वीट पर नकारात्मक राय भी रख देता है तो एडिटर्स गिल्ड तलवारें खीच लेता है।
ज्ञात हो कि इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई पर भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय ने नकारात्मक राय रखी थी। जिसपर तत्काल आपत्ति जताते हुए एडिटर्स गिल्ड ने भाजपा नेता/भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय से माफी मांगने और ट्वीट डिलीट करने का दबाव बनाया था।
करीब एक महीने पहले के इस मामले पर सुधीर चौधरी, अमिश देवगन और तमाम पत्रकारों ने एडिटर गिल्ड की कार्यशैली को एकतरफा बताते हुए इस पर तमाम सवाल गये थे। ये भी जिक्र निकला था कि जब लाइव शो में कांग्रेस प्रवक्ता ने अमिश देवगन को खुलेआम कई बार भड़वा और दलाल कहा, ऐसे में पत्रकारों के संगठन खामोश रहे। जामिया में जीटीवी को खुलेआम अपमानित किया गया। शाहीनबाग मे दीपक चौरसिया के साद धक्का मुक्की हुई। इसके बाद बीते सोमवार को दीपक चौरसिया और सुधीर चोधरी को शाहीनबाग में अपमानित किया गया। गोदी मीडिया गो बैक-दलाल मीडिया गो बैक के नारे लगाये गये। लेकिन इन सब के बावजूद भी एडिटर्स गिल्ड और देश के तमाम पत्रकार संगठन खामोश हैं।
कहीं ऐसा तो नही कि सरकार के बेहद ख़ास कहे जाने वाले और बार-बार अपमान झेलने वाले ये विख्यात पत्रकार अपनों के बीच बेगाने होते जा रहे हैं।







