ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में कोई नहीं जान सका है। उनके द्वारा पेश की जाने वाली चुनौतियों के बारे में न तो पूर्वानुमान लग सकता है और न ही उनके बाद कोई भविष्यवाणी ही की जा सकती है। ताजा उदाहरण कोरोना वायरस के रूप में दुनिया के लिये भय का कारण बना हुआ है। चीन से फैला ये वायरस भारत, अमेरिका, फ्रांस, जापान, तिब्बत, थाईलैण्ड, जापान और मंगोलिया में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जानें भी जा चुकी हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चीन के लिये आपातकालीन स्थिति कहा है। प्रभाव के केन्द्र चीन के वुहान शहर से अन्य देशों में आने वाले यात्रियों के जरिये यह अन्य देशों में कदम रख रहा है। जहां तक भारत की बात है तो यहां मुंबई के बाद राजस्थान और बिहार में कोरोना वायरस की दस्तक हो चुकी है।

भारत सरकार ने इससे बचाव और निपटने के लिये कई कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश में तन्हाई के अलग वार्ड बनाने के आदेश दिये गये हैं तो भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है। पूर्व में कई खतरनाक बीमारियों का प्रकोप विश्व के लिये एक चुनौती बन चुका है।
खुद चीन में ही वर्ष 2003 के दौरान सार्स नामक महामारी फैली थी जिसमें उसे करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ था। सार्स की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को करीब 40 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। इसलिये कोरोना के फैलने के साथ तमाम रूपों में चिन्ताएं भी फैल रही हैं।
विश्व भर में लोग अपने-अपने हिसाब से इसके बारे में कयास लगा रहे हैं। कोई इसको खुद चीन की कारस्तानी का परिणाम बताता है तो कोई इसके पीछे अमेरिकी साजिश देख रहा है। जब हम यह सोचते हैं कि आज दुनिया के तमाम देश विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की की नई सीढ़ियां चढ़ चुके हैं तो माना यह जा रहा है कि कोरोना वायरस के मामले में भी कोई समाधान शीघ्र ही खोजने में कामयाबी मिल जाएगी लेकिन इस वायरस के स्वरूप को देखने से ऐसा हो पाना आसान नहीं लगता।
जहां तक इससे होने वाले नुकसान की बात है तो चीन ही नहीं बल्कि उसके आसपास के तमाम देशों में भी विभिन्न रूपों में इसे देखा व अनुभव किया जा रहा है। इसलिये जरूरत ये है कि इसकी रोकथाम के लिये दुनिया के सभी देश एवं उनकी वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं युद्धस्तर पर कार्य करें। जितनी जल्दी इसके प्रभाव को सीमित किया जा सकेगा, उतना ही लोग सुरक्षित तथा निरापद रह सकेंगे। इस बारे में किसी भी तरह की लापरवाही खुद मानवता के लिये ही नुकसानदेह साबित होगी।







