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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    चुनौती बनता पोर्नोग्राफी और सोशल मीडिया का दुरुपयोग

    By February 26, 2020 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    पोर्नोग्राफी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग की विकराल चुनौती आज हमारे सामने हैं. इनसे निपटने में हम अभी शायद सक्षम नहीं हैं. हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि पॉर्नोग्राफी और चाइल्ड पॉर्नोग्राफी इ-कॉमर्स को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण उत्प्रेरक इ-कॉमर्स के जरिये इनकी काफी खरीद-फरोख्त की जाती है. इसी तरह से सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल, खासकर भारत में, बहुत ज्यादा बढ़ गया है.

    भारतीय समाज में परपीड़ा की प्रवृत्ति है, जो दूसरों को निशाना बनाने में चुस्कियां लेता है. ये जो सामाजिक प्रकरण हैं, उन्हें ठीक करने के लिए हम कारगर योजनाएं नहीं बना पाये हैं. कानून के नजरिये से देखें, तो हमारे पास 2000 में बना सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आइटी एक्ट) है. जब यह साइबर कानून बना था, तो यह केवल पॉर्नोग्राफी के लिए था. बहुत आलोचना होने पर 2008 के संशोधन में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को भी अपराध के तौर पर जोड़ा गया.

    इस कानून के मुताबिक, अगर कोई अश्लील इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट का प्रकाशन और प्रसारण करता है या ऐसी गतिविधि में सहयोग करता है, तो यह एक दंडनीय अपराध है तथा इसके लिए तीन साल की कैद व पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. साल 2000 में यह अपराध गैरजमानती था, पर 2008 के संशोधन में इसे जमानती अपराध बना दिया गया. आइटी एक्ट में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी आज एक घिनौना दंडनीय अपराध है और इसके लिए पांच साल की कैद और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. इसमें इस अपराध को विस्तार से परिभाषित किया गया है और इसमें इंटरनेट पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की ब्राउजिंग को भी अपराध बना दिया गया है. यह दूसरी बात है कि पिछले 12 सालों में इन अपराधों के लिए दंडित करने के मामले न के बराबर हैं.

    इस तरह से पॉर्नोग्राफी के बारे में कानून तो है, पर वह बहुत हल्का है. भारतीय संसद यह नहीं कहती है कि कोई पॉर्नोग्राफी नहीं देखे. असल में ऐसा कोई कानून ही नहीं है, जो अश्लील कंटेट देखने को अपराध मानता हो. लेकिन कानून की चिंता है कि कोई ऐसे कंटेंट का प्रकाशन और प्रसारण न करे. ऐसी गतिविधियां करने पर कानूनी प्रावधान लागू होते हैं. लेकिन जमानती अपराध होने के कारण ऐसे काम पर अंकुश लगाने में मदद नहीं मिलती. इस वजह से सजा देने के उदाहरण भी कम हैं. जहां तक सोशल मीडिया के दुरुपयोग का सवाल है, इस संबंध में हालत और भी खराब है, क्योंकि भारत के आइटी एक्ट में सोशल मीडिया शब्द को ही परिभाषित नहीं किया गया है.

    ऐसे में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न तरह के जो साइबर अपराध हमारे सामने आते हैं, वे कानूनी दायरे में नहीं आते हैं. साल 2008 के संशोधन में एक प्रावधान बनाया गया था- धारा 66ए. सोशल मीडिया के दुरुपयोग के कुछ पहलुओं को इसके दायरे में लाया गया था. लेकिन 2015 में उच्चतम न्यायालय ने इस धारा को गैरकानूनी घोषित कर दिया क्योंकि यह संविधान की व्यवस्थाओं के अनुरूप नहीं था. इस स्थिति में सोशल मीडिया के बेजा इस्तेमाल को लेकर ऐसा करनेवाले लोग परेशान नहीं होते और उन्हें कोई चिंता नहीं होती, क्योंकि उन्हें यह पता है कि इसके लिए कोई कानूनी प्रावधान तो है नहीं. और, उन्हें यह भी पता है कि ऐसा करने पर उनकी जानकारी सेवाप्रदाता मुहैया नहीं करायेगा. साल 2015 के एक फैसले में उच्चतम न्यायालय सोशल मीडिया के सेवाप्रदाताओं को निर्देश दे चुका है कि उनके पास जानकारियां देने के लिए हजारों-लाखों निवेदन आयेंगे, लेकिन उन्हें ऐसे निवेदनों पर ध्यान नहीं देना है. केवल सरकार के कहने या अदालती निर्देश पर ही ऐसी जानकारियां देनी होती हैं. इस वजह से सेवाप्रदाता से जानकारी प्राप्त करना बहुत चुनौतीपूर्ण काम हो गया है. ऐसे में स्वाभाविक रूप से हमारे देश में सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है तथा ऐसे प्लेटफॉर्म के जरिये कई तरह की आपराधिक गतिविधियां हो रही हैं तथा गलत व नुकसानदेह सूचनाओं को प्रसारित किया जा रहा है.

    इस पृष्ठभूमि में ऐसी समस्याओं पर अंकुश लगाने के बारे में केंद्रीय सूचना तकनीक मंत्री रविशंकर प्रसाद की घोषणा बहुत स्वागतयोग्य पहल है और उचित दिशा में उठाया गया कदम है..

    क्योंकि, पॉर्नोग्राफी, चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर अगर सरकार प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ती है, तो भारतीय समाज में पैदा हो रही कई समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी, जो अनेक स्तरों पर व्यक्ति व समाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही हैं. लेकिन, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सरकार क्या कहना चाह रही है और उसके पास इस संबंध में क्या योजनाएं हैं. यह बाद में ही पता चल सकेगा कि सरकार ऐसे अपराधों को रोकने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव करेगी, कुछ नियमन करेगी, नये कानून लेकर आयेगी या फिर अभी के प्रावधानों को ही समचित रूप से लाग करने की कोशिश होगी. लेकिन इन समस्याओं के बारे में जागरुकता निश्चित रूप से सराहनीय बात है और इनके समाधान के लिए दृढ़संकल्प के साथ सरकार को आगे बढ़ना है, यह महत्वपूर्ण है.

    • प्रस्तुति: पवन 

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