सीएए विरोध को लेकर रविवार को जिस तरह दिल्ली से लेकर लखनऊ तक माहौल खराब करने की कोशिश की गई, वह चिन्तनीय है। इस बात में कोई शक नहीं दिल्ली के शाहीनबाग और लखनऊ के घंटाघर में धरनों के लगातार चलने के बाद भी हालात को पूरी तरह नियंत्रण में रखने में दोनों ही जगहों के प्रशासनों ने बेहद दूरदर्शिता भरी सूझबूझ से काम लिया है और किसी भी अन्य मामले को मुद्दा नहीं बनने दिया है। यह बड़ी बात है जिसका सम्मान तो किया ही जाना चाहिये, साथ ही ऐसा कोई भी काम करने से बचना भी चाहिए जिससे माहौल बिगड़ने की तनिक भी आशंका हो।
शायद कुछ लोगों से यह बात बर्दाश्त नहीं हो पा रही है। लेकिन हिंसा किसी भी स्तर पर ठीक नहीं, जरुरत है देश में आपसी भाईचारा और बढ़ाने की। बात चाहे दिल्ली की हो या अलीगढ़ की या लखनऊ की। ऐसी कोई वजह नहीं थी कि विरोध प्रदर्शन किए जाने वाली जगह पर ऐसा कोई काम हो जिससे माहौल और गर्म हो सकने की आशंका हो। इसी तरह दिल्ली में भी बेवजह विरोध करके उबाल लाने का प्रयास हुआ तो अलीगढ़ में भी मौका देखकर फिजा बिगाड़ने की कोशिश हुयी।
सच तो ये है कि इस तरह की बातों से किसी तरह का फायदा समाज को नहीं हो सकता। जो कुछ ऐसी जगहों पर होता है, उसके पीछे व्यक्तिगत कारण ज्यादा जिम्मेदार होते हैं। इसलिए जरूरत यह ध्यान रखने की भी है कि हमारे बीच किस तरह के लोग आ रहे हैं और क्या कर रहे हैं। उन सभी के प्रति सावधान रहना आवश्यक है।
चूंकि यह मामला कई बिन्दुओं से जोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं तो यह सतर्कता और भी जरूरी हो जाती है। वैसे यहां पर इन सभी जगहों के प्रशासन की एक बार फिर तारीफ करनी होगी कि अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर एक बेहद गलत खबर मुद्दा बनने से बच गई।






