खड़ताल के साथ संजय कौशिक का तालमेल
इसमें कोई शक नहीं कि कई सारे एक्टर्स अपने किरदार में वास्तविकता लाने के लिये किसी भी हद तक जा सकते हैं। अलग-अलग जोनर, खासकर मायथोलाॅजी में चुनौतियां सबसे ज्यादा होती हैं। भाषा, भारी-भरकम कपड़े और मेकअप के अलावा भी एक्टर को कई बार अपने लुक को पूरी तरह से दिखाने के लिये अलग से कोई एसेसरी या प्राॅप लेना पड़ता है। ऐसा ही एक किरदार ऋषिमुनि नारद का है, जिसे -ज्ट के ‘कहत हनुमान जयश्रीराम’ में संजय कौशिक ने निभाया है। वह हाथों में खड़ताल लिये नजर आ रहे हैं, जोकि एक प्राचीन और प्रमुख वाद्य है। शूटिंग के दौरान नारद के किरदार के लिये यह एक मुख्य प्राॅप होता है।
इस बारे में बताते हुए, संजय कहते हैं, ‘‘मुझे म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बजाने में दिलचस्पी रही है और मुझे यह अच्छा लगता है, लेकिन खड़ताल लेकर शूटिंग करना मेरे लिये थोड़ा मुश्किल हो गया है। इसमें हाथ के काफी सारे मूवमेंट करने पड़ते हैं, लेकिन कई बार मुझे दोनों के साथ तालमेल बिठाने में परेशानी होती है- हाथों के भाव के साथ-साथ डायलाॅग बोलने के दौरान कई बार मेरा ध्यान भटक जाता है। लेकिन सच कहूं तो कोई यह नहीं कह सकता है कि मैं उससे तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा हूं। हाथ और मुंह का तालमेल सही तरीके से होना बेहद जरूरी है, जोकि परदे पर सही नज़र आ सकता है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है! इसके लिये बहुत ज्यादा प्रैक्टिस और धैर्य की जरूरत होती है। लेकिन मुझे पूरी उम्मीद कि मैं जल्द ही इसमें माहिर हो जाऊंगा।’’
थियेटर करने के दौरान संजय ने मायथोलाॅजिकल किरदार निभाये हैं, लेकिन शानदार सेट पर बड़े-बड़े प्राॅप के बीच में भूमिका निभाने का अनुभव उससे काफी अलग है। अपने अनुभव के बारे में बताते हुए, संजय कहते हैं, ‘‘टेलीविजन पर मायथोलाॅजिकल किरदार निभाने का यह मेरा पहला मौका है और मेरे लिये अनुभव काफी अच्छा रहा है। कौन ऐसा होगा, जिसे-नारायण नारायण का जाप याद नहीं होगा! हम सब बचपन से इसे सुनते आ रहे हैं और यह किरदार निभाने का मौका मिलना ही अपने आपमें एक आशीर्वाद की तरह है। इस किरदार में थोड़ा बहुत ह्नयूमर भी है, जो इसे मजेदार और दिलचस्प अनुभव बनाता है।’’
बता दें कि ‘कहत हनुमान जयश्रीराम’ रात 9:30 बजे, सोमवार से शुक्रवार केवल एंड टीवी पर होता है।







