हालांकि ज्यादातर लोग इस बात पर खास ध्यान नहीं देते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कथन परिपक्व सोच का उदाहरण है कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता है। जरूरत है तो योग्य योजक की। उनका यह भी कहना है कि प्रदेश के युवाओं में भरपूर प्रतिभा है, जरूरत उन्हें सही दिशा देने की है। किसी भी समाज के लिए ये दोनों ही बातें बहुत जरूरी हैं। सामाजिक उत्थान व सेवायोजन में बेहद घनिष्ठ संबंध है। उचित सेवायोजन से जहां समाज में समृद्धि बढ़ती है तो वहीं विभिन्न कार्यों के माध्यम से उसे आगे ले जाने के अवसर बनते हैं।
इसका उदाहरण ओडीओपी यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट है। इस परियोजना के माध्यम से एक साल में पांच लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इसके अलावा जिलों की पहचान बनने वाले उत्पादों को सामने लाने को प्रोत्साहन मिलेगा जो उसकी आय में भी वृद्धि में सहायक होगा। दरअसल हमारे तौर तरीकों में आज भी इतना दम है कि यदि इनको ही योजनाबद्ध ढंग से प्रोत्साहित किया जाय तो प्रगति में ये सर्वोच्च योगदान दे सकती हैं। समस्या तब होती है जब एक काम कर लिया जाय तो दूसरे के लिए इन्तजार करना हो और अन्त में निराश भी होना पड़े।
मुख्यमंत्री ने खुद इस समस्या को अनुभव किया तथा परियोजना का ढांचा इस तरह तैयार करने पर बल दिया जिससे ऐसी समस्याओं का सामना आम लोगों को न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने ‘कौशल सतरंग’ के जिन सात घटकों का शुभारम्भ किया है, वे तमाम तरह की छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर निर्धारित किए गए हैं लेकिन उनकी सफलता सामाजिक उत्थान की अकथनीय इबारत लिखेगी।
ऐसे में जरूरी यह है कि एक और सरकारी मशीनरी और दूसरी ओर सामान्य लोग इसके महत्व को समझें तथा उसी के अनुसार काम करें। ऐसा होने पर यूपी खुशहाली के एक नए दौर में प्रवेश करेगा जो आगे की राह भी दिखाएगा।







