मित्र पुलिस का आह्वान पहले भी होता रहा है। लेकिन कोरोना राहत के दौरान इसका बेहतरीन रूप दिखाई दे रहा है। इस आपदा में मित्र पुलिस की मिसाल कायम हुई है। पुलिस कर्मी और अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर जरूरतमंदों की सहायता कर रहे है।

पुलिस महानिदेशक हितेश चन्द्र अवस्थी भोर में ही बस स्टैंड पहुंच गए। यहां मुख्यमंत्री ने निर्देश पर उंन्होने बड़ी संख्या में लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का इंतजाम कराया। अपने सहयोगियों के साथ उनको खाद्य सामग्री भी वितरित की। इसके अलावा प्रतिदिन सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस जरूरतमंदों को भोजन वितरित करने में सहयोग दे रही है। ऐसे समय में इनका व्यवहार मित्र पुलिस की कल्पना को साकार करता है।
योगी ने संभाला मोर्चा
दिल्ली के मुख्यमंत्री लॉक डाउन के दौरान व्यवस्था कायम रखने में विफल रहे है। हमेशा की तरह उंन्होने भारी भरकम वादे किए,लेकिन उसपर क्रियान्वयन नहीं करा सके। उंन्होने लाखों श्रमिको को भोजन देने की बात कही थी। लेकिन यह भी संभव नहीं हुआ। दिल्ली से पलायन करने वालों को भीड़ विचलित करने वाली है। कोरोना से मुकाबले की तैयारी यहां तारतार हो गई।

इधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रात भर जाग कर दिल्ली से आ रहे लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था स्वयं देखते रहे। इसके लिए पर्याप्त संख्या में बसें लगाई गई थी। इन यात्रियों के लिए भोजन व इलाज की व्यवस्था भी की गई थी। फ्री बिजली पानी के मुद्दे पर चुनाव जीतना आसान है,लेकिन आपदा काल में अरविंद केजरीवाल अपनी क्षमता नहीं दिखा सके। केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। उसके हस्तक्षेप की संकटकालीन स्थिति यहाँ बन गई है।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री








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Promises like piecrust are made to be broken.