शकटं पञ्चहस्तेन दशहस्तेन वाजिनम्।
हस्तिनं हस्तसहस्त्रेण देशत्यागेन दुर्जनम्।
अर्थात : बैलगाड़ी से पांच हाथ, घोड़े से दस हाथ और हाथी से हजार हाथ दूर रहना चाहिए, परन्तु दुर्जन से बचने के लिए तो उसका देश ही छोड़ चाहिए।
हस्ती अंकुशमात्रेण वाजी हस्तेन ताड्यते।।
श्रृंगी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः।।
अर्थात : हाथी को अंकुश से, घोड़े को हाथ के चाबुक से, सींगधारी पशु को हाथ के डण्डे से ताड़न कर वश में किया जाता है, परन्तु दुर्जन कभी वश में नहीं आता, अतः उस पर हाथ से खड्ग लेकर प्रहार करना चाहिए, अर्थात उसे मार डालना चाहिए।







