आपदा संकट के समय का एक सबसे बड़ा डर अधिक कीमतें वसूला जाना है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से यूपी परिवहन निगम की टैक्सियों द्वारा ढाई सौ किमी की दूरी के लिए दस से बारह हजार रुपए का किराया वसूला जाना इसी का एक उदाहरण है। यह ठीक है कि मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद निगम ने जांच के लिए समिति का गठन कर दिया लेकिन लालच तो एक बार फिर सिर चढ़कर बोल ही गया।

कोरोना के कारण लागू हुए लॉकडाउन में यह अधिक वसूली का अकेला मामला नहीं है। छोटी से छोटी से चीजों और खाने-पीने के सामानों के दामों में भी जमकर मुनाफाखोरी की गई है। यह ठीक है कि प्रशासन इस मामले में सतर्क रहा और ऐसे मामले सामने आते ही आवश्यक कार्रवाई की गई लेकिन इसका सिलसिला रुक ही गया हो, ऐसा भी नहीं रहा। इसी का एक उदाहरण बनकर परिवहन निगम की टैक्सियों का मामला सामने आया।
यह बात तब और अजीब लगती है जब हम यह देखते हैं कि एक तरफ तो हमारे प्रधानमंत्री गरीबों के लिए हर तरह से राहत पहुंचाने के माध्यमों का सहारा ले रहे हैं, राहत योजनाओं की झड़ी लगा दी है जिनके जरिए उनके कष्टों को काफी कम किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर समाज में इस तरह के लोग हैं जो लोगों की परेशानियों का फायदा उठाने के लिए तरहतरह के तरीके निकाल रहे हैं।
बात केवल अधिक किराया वसूली की ही नहीं है, बल्कि बाजारों में सामानों के दाम बढ़ाकर लिये जाने के भी तमाम उदाहरण सामने आते रहते हैं। जो मीडिया में सामने आ जाते हैं, उनका तो सभी को पता लग जाता है और जिनको कवरेज नहीं मिलता वे दबे ही रह जाते हैं लेकिन यह सही है कि ऐसा हो रहा है। अभी तक जैसे आसार दिखाई दे रहे है, उनके मुताबिक लॉकडाउन चौथा चरण भी दो दिन के बाद लागू हो जाएगा और कुछ बंदिशें उसमें भी लागू रहेंगी। अधिक दाम लिए जाने की हरकत उसमें भी चालू रह सकती है। इसलिए प्रशासन को इस पर सतर्क नजरें रखनी होंगी।







