इबिलू किटू राम,
तोड़ लाए चोरी से आम।
पकड़े गए मगर तीनों,
चुका दिए चुपके से आम।
बोले चाचा माफ करो,
नहीं करेंगे अब यह काम।
नहीं बताना बापू को,
अम्मा को हम सबके नाम।
चाचा बोले नहीं चाहिए,
बच्चों तुमसे कुछ भी दाम।
वादा कर लो चोरी का,
नहीं करोगे फिर से काम।
– प्रभुदयाल श्रीवास्तव
चलो बनाएं रेल:
सारे मित्रों और सखाओं,
चलो बनाएं रेल।
रेल बनाकर साथ चले तो,
बढ़ जाएगा मेल।
मुन्ना बन जाएगा
इंजन, रिया गार्ड का डिब्बा।
डिब्बा बनकर जुड़ जाएंगे,
रमजानी के अब्बा।
आगे बढ़कर सिखलाएंगे,
हमें रेल का खेल।
शयन यान बनकर जुड़ जाएं, नीना, मीना, झब्बू।
शीला, नीता, तब्बू।
स्टेशन-स्टेशन होगी,
भारी रेलम पेल।
चेक करेंगे टिकट रेल में,
मोटे छन्नू भाई।
बिना टिकट वालों की भैया,
समझो शामत आई।







