राहुल कुमार गुप्ता
हुकूमत हाथ में है पर, वो मिट्टी की इबादत है।
दिखावा कर नहीं सकती, जिसे हकीकत की आदत है।।
वो कृष्णा आज सांसद हों, या कल रहीं अध्यक्षा हों।
अदब और सादगी की, उन्हीं से एक विरासत है।।
खेतों की सोंधी खुशबू को, वो आँचल में समेटे हैं।
वो महलों में नहीं, जन हृदय में अपना राज समेटे हैं।।
नहीं है रत्ती भर भी मद, न कुर्सी का गुमान उन पर।
फिदा है सादगी उनकी, झुका है आसमान उन पर।।
शिवशंकर जी के जीवन की, वो अर्धांगिनी पावन।
रखा है लोक-सेवा का, हमेशा एक ध्यान उन पर।।
कृष्णा देवी रूप करुणा का, वो ममता का समंदर हैं।
हुनर ग्रामीण गृहणी सा मगर सियासत की सिकंदर हैं।।
कभी खलिहान की मिट्टी, कभी दिल्ली के गलियारे।
निभाती हैं बड़ी शिद्दत से, वो अपने कर्तव्य सारे।।
चित्रकूट और बाँदा की, दुआएँ साथ चलती हैं।
मुकम्मल हो रहे आज, उनके जनता से किए वादे।।
मुबारक हो जन्मदिवस ये की खिलें खुशियों के गुलशन सब।
सलामत आप रहें हरदम, करें ये प्रार्थना हम सब।।







