Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, November 6
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Hot issue

    इतिहास बना गए केशवानन्द भारती

    ShagunBy ShagunSeptember 11, 2020 Hot issue No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 715

    हमारे देश की धरती पर समय-समय पर अनेको आलौकिक विभूतियों ने जन्म लेकर अपना सम्पूर्ण जीवन जन कल्याण व समाज सेवा में अर्पित कर दिया। ऐसे ही एक आलौकिक शक्ति श्री केशवानंद भारती आज देश के लोगों को छोड़ कर चले अवश्य गये हैं लेकिन केशवानंद भारती द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के कारण संसद एवं न्यायपालिका के मध्य वह संतुलन कायम किया जा सका जो इस फैसले के पहले 23 वर्षो तक यह संभव नहीं हो पाया था।

    केशवानंद भारती जी के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत ने जो फैसला दिया था वह स्वतन्त्र भारत की न्यायपालिका के इतिहास में दिये गये महत्वपूर्ण फैसलों में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण फैसला था।

    उनके द्वारा किये गये ऐसे सभी प्रयास केवल एक मुख्य सवाल के जवाब के लिए थे कि क्या संसद की शक्ति संविधान का असीमित संशोधन करने के लिए थी? दूसरे शब्दों में, क्या संसद संविधान के किसी भी हिस्से को रद्द, संशोधित एवं बदल सकती है? चाहे वो व्यक्ति के सभी मौलिक अधिकार छीन लेने का ही क्यों ना हो?

    केशवानंद भारती द्वारा देश के सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका जिसकी वजह से ही उन्हें लोगों के मध्य सदैव याद किये जाते रहेंगे। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया एक फैसले में यह व्यवस्था दी गयी कि देश के लोकतन्त्र में आम जनता द्वारा चुनी गई संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार अवश्य है लेकिन वह संसद संविधान के मूल ढांचे में किसी भी तरह की संशोधन या परिवर्तन नहीं कर सकती है जिस पर देश की सम्पूर्ण संविधान ही आधारित है। यह फैसला कोई साधारण फैसला नहीं था बल्कि देश की सर्वोच्च न्यायालय की 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने इसे बहुमत से पारित किया था।

    यह फैसला आगे चलकर न्यायिक इतिहास में ‘केशवानन्द भारती केस’ के रूप में ख्याति पाई। जिसमें देश के केरल राज्य के भूमि सुधार कानून को चुनौती दी गयी थी, जिसका मुख्य दृष्टिकोण यह था कि वर्ष 1970 तक संविधान में सम्पत्ति के मौलिक अधिकार या मूलभूत अधिकारों में शामिल था जिसे देश के बैंको की राष्ट्रीयकरण अधिनियम बनाते वख्त संशोधित कर दिया गया था। वर्ष1969 में जब श्रीमती इन्दिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, उस वख्त एक अध्यादेश द्वारा तत्कालीन प्रधानमन्त्री को सर्वोच्च न्यायालय में इसके लिये चुनौती भी दी गई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने इस अधिनियम संसोधन को अवैध करार देते हुये इसे निरस्त कर दिया था। उस वख्त श्रीमती इंदिरा गांधी ने बीच में ही लोकसभा को भंग करके वर्ष1971 के शुरूआती दिनों में देश मे चुनाव करवाया जिसमें उन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली थी और उसके बाद उन्होंने संसद में संविधान संशोधननके जरिये बैंकों के राष्ट्रीयकरण करने के लिये नया कानून बनाया था।

    बता दें कि देश के केरल राज्य में भूमि सुधार कानून के तहत सम्पत्ति के अधिकार को लेकर सर्वोच्च न्ययालय में केशवानंद भारती द्वारा जो चुनौती दी गयी थी उसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष1974 में जो फैसला सुनाया गया था। यह मुकदमा वास्तव में अभूतपूर्व था क्योंकि उस वख्त श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा देश मे यह बहस छेड़ दी गयी थी कि लोकतन्त्र में संसद ही सर्वोच्च संस्थान होती है। यह स्थिति एक प्रकार से न्यायपालिका एवं संसद दोनो के मध्य छिड़ी एक तरह की शीतयुद्ध का दौर था। श्रीमती इन्दिरा गांधी के शासन काल के दौरान संसद में सबसे अधिक बहुमत के वल पर इस प्रस्ताव को पारित करा लिया था कि संसद संविधान के किसी भी अनुच्छेद या भाग को संशोधित कर सकती है जिसे न्यायिक समीक्षा के तहत नहीं रखा जा सकता। जिसमें अन्ततः विजय देश के स्वतन्त्र न्यायपालिका की ही हुई  क्योंकि इसने संसद के अधिकारों की सीमा रेखा खींच कर उसे बांध दिया, जो देश के संविधान निर्माताओं का भारतीय लोकतन्त्र की बहुमत की तानाशाही को निरंकुश होने से रोकने के लिए दूरदृष्टिगत साबित हुई ।

    देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सम्पत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से बाहर किये जाने को वैध माना लेकिन इसके साथ ही शेष मौलिक अधिकारों को अपरिवर्तनीय बना दिया। बाद में 1977 में जब केन्द्र में स्व. मोरारजी देसाई के नेतृत्व में देश मे जनता पार्टी की सरकार स्थापित हुई तो सम्पत्ति के अधिकार को संवैधानिक अधिकार प्रदान कर दिया गया। क्योंकि यह मुकदमा 31 अक्टूबर वर्ष 1972 से प्रारम्भ होकर 23 मार्च वर्ष 1973 तक चला जो कि केशवानन्द भारती के प्रयासों से ही संभव हुआ था और जिसमे अंतः भारत का लोकतन्त्र विजयी हुआ और उसके बाद भारतीय संविधान की प्रमुख बातों से लेकर पूरी दुनिया के अन्य लोकतान्त्रिक देशों के संविधानों की भी चर्चा हुई। केशवानन्द भारती ने यह ऐतिहासिक न्यायिक युद्ध लड़ा था।

    केशवानंद भारती जी को उनकी समाज सेवा और शोषितों वर्ग के लोगों को हमेशा सशक्त बनाने के लिये किये गये उनके प्रयासों के लिये सदैव याद किया जाता रहेगा। उनका हमेशा से हमारे देश के संविधान और भारतवर्ष की समृद्ध शाली संस्कृति से गहरा सम्बन्ध रहा, जोकि पीढ़ि दर पीढ़ि तक हमे हमेशा प्रेरित करती रहेगी। – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

    Shagun

    Keep Reading

    It is Diwali in the country, but a difficult phase has begun for Trump...

    देश में दीपावली लेकिन ट्रम्प का बुरा दौर शुरू हो चुका है…

    सियासी द्वेष या सपा से आज़म को अलग करने की ज़िद!

    आखिर लोकतंत्र को वास्तव में किससे खतरा?

    The Price of His Whims: Trump’s Defeat and America’s Message

    अपनी सनक का खामियाजा: ट्रंप की हार और अमेरिका का संदेश

    Power on the Streets: Democracy’s Inverted Flow

    सत्ता सड़क परः लोकतंत्र की उलटी गंगा

    Pradhan Mantri Surya Ghar Muft Bijli Yojana provides relief to people from electricity bills: A. K. Sharma

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से लोगों को मिल बिल से राहत : ए. के. शर्मा

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    इंस्पेक्टर के बंद घर में चोरों का दुस्साहस: जेवर-नकदी लूटे, महंगी शराब गटककर पार्टी मनाई

    November 6, 2026
    Trump's Stern Ultimatum to Iran: 'Complete Surrender' on Nuclear Missiles—or an Attack?

    अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों पर ईरान का कड़ा रुख, तेहरान ने समझौते की उम्मीदों पर फेरा पानी

    November 6, 2026

    रामनगरी के दीपोत्सव की भव्यता पर टिकी निगाहें, 10वें आयोजन को यादगार बनाने की तैयारी

    November 6, 2026
    It is Diwali in the country, but a difficult phase has begun for Trump...

    देश में दीपावली लेकिन ट्रम्प का बुरा दौर शुरू हो चुका है…

    November 6, 2026

    सियासी द्वेष या सपा से आज़म को अलग करने की ज़िद!

    November 6, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading