खामोश हत्यारे के नाम से कुख्यात उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) दिल और मस्तिष्क के दौरे के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। चिकित्सा विशेषज्ञ बताते के अनुसार उच्च रक्तचाप के कारण दिल के दौरे व ब्रेन अटैक या स्ट्रोक होने का खतरा दोगुना हो जाता है और अगर हाइपरटेंशन के अलावा तनाव एवं नींद की समस्या भी हो तो यह खतरा चार गुना तक बढ़ सकता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ व नई दिल्ली स्थित कालरा हॉस्पीटल एंड श्रीराम कार्डियो थोरेसिक एंड न्यूरोसाइंसेस सेंटर (एसआरसीएनसी) के निदेशक डॉ. आर.एन. कालरा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि उच्च रक्तचाप और दिल का गहरा संबंध है। उच्च रक्तचाप हृदय रोग के लिए एक महत्वपर्ण जोखिम कारक है, क्योंकि जब रक्तचाप बढ़ जाता है, तो शरीर के चारों ओर रक्त पंप करने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस अतिरिक्त काम से दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती है, और इससे धमनी की दीवारें कठोर हो सकती हैं या उन्हें नुकसान भी पहुंच सकता है। इसके कारण, शरीर के अंगों तक कम ऑक्सीजन पहुंचता है और हृदय के अधिक काम करने के कारण समय के साथ हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है।
नई दिल्ली स्थित फोर्टिस एस्कार्ट हार्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राहुल गुप्ता के अनुसार, उच्च रक्तचाप न केवल दिल के दौरे के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि यह ब्रेन स्ट्रोक का भी एक प्रमुख कारण है। नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, हाइपरटेंशन के कारण ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सिस्टोलिक रक्तचाप में हर 10 एमएम हीमोग्राम बढ़ने से इस्कीमिक स्ट्रोक का खतरा 28 प्रतिशत तथा हैमेरेजिक स्ट्रोक का खतरा 38 प्रतिशत बढ़ता है। हालांकि उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण रखने पर स्ट्रोक होने का खतरा घट जाता है। वर्ष 2012 में जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 13 करोड़ 90 लाख लोग अनियंत्रित उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं और यह संख्या हर साल बढ़ रही है।







