- पावर कारपोरेशन द्वारा गाॅंव को ज्यादा बिजली देने के नाम पर उनकी दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव पर पिछली सरकारों के आपूर्ति व दरों के विश्लेषण पर किया खुलासा
- पिछली 2 सरकारों व वर्तमान सरकार के आंकडों से स्वतः खुल रही है सबकी पोल
- विद्युत आपूर्ति के नाम पर गाॅंव को शहर की तरह ट्रीट कर उनकी दरों में व्यापक वृद्धि कहाॅं तक है जायज क्या कुछ घण्टे ज्यादा बिजली देकर ही गाॅंव को बनाया जा सकता है शहर
- आज भी गाॅंव में विद्युत आपूर्ति के नाम पर मचा है हाहाकार
लखनऊ 28 अगस्त। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा वर्ष 2017-18 के लिये ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 260 से 350 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिये जाने के बाद अब पावर कारपोरेशन द्वारा उस पर पर्दा डालने के लिये यह प्रचारित किया जा रहा है कि जब बिजली ज्यादा देंगे तब दाम भी ज्यादा लेंगे। अब गाॅंव में भी शहर की तरह बिजली मिल रही है तो दरें भी ज्यादा होंगी लेकिन सच्चाई क्या है गाॅंव में कितनी बिजली मिल रही है यह सभी को पता है पूरे प्रदेश में आज भी विद्युत आपूर्ति का हाल बुरा है लेकिन आंकडेबाजी के खेल से कागजों का पेट भर रहा है और उपभोक्ता पर बोझ डालने की तैयारी हो रही है।
उपभेाक्ता परिषद ने आज इसी मुददे पर एक अध्ययन कर पिछली सरकारों व भाजपा सरकार में प्रस्तावित विद्युत आपूर्ति व विद्युत दरों पर बडा खुलासा कर रहा है। जो स्वतः सिद्ध कर देंगे कि कब किस सरकार में कितने घण्टे बिजली मिली और दरें क्या थीं? और मौजूदा प्रस्तावित दरें क्या हैं? लखनऊ अगस्त प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा वर्ष 2017-18 के लिये ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 260 से 350 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिये जाने के बाद अब पावर कारपोरेशन द्वारा उस पर पर्दा डालने के लिये यह प्रचारित किया जा रहा है कि जब बिजली ज्यादा देंगे तब दाम भी ज्यादा लेंगे। अब गाॅंव में भी शहर की तरह बिजली मिल रही है तो दरें भी ज्यादा होंगी लेकिन सच्चाई क्या है गाॅंव में कितनी बिजली मिल रही है यह सभी को पता है पूरे प्रदेश में आज भी विद्युत आपूर्ति का हाल बुरा है लेकिन आंकडेबाजी के खेल से कागजों का पेट भर रहा है और उपभोक्ता पर बोझ डालने की तैयारी हो रही है। उपभेाक्ता परिषद ने आज इसी मुददे पर एक अध्ययन कर पिछली सरकारों व भाजपा सरकार में प्रस्तावित विद्युत आपूर्ति व विद्युत दरों पर बडा खुलासा कर रहा है। जो स्वतः सिद्ध कर देंगे कि कब किस सरकार में कितने घण्टे बिजली मिली और दरें क्या थीं? और मौजूदा प्रस्तावित दरें क्या हैं?
प्रदेश में पार्टी की सरकार वित्तीय वर्ष ग्रामीण आपूर्ति ग्रामीण घरेलू दर
बहुजन समाज पार्टी 2009-10 10 घण्टे 22 मिनट 125 प्रति कनेक्शन प्रति माह
समाजवादी पार्टी 2012-13 14 घण्टे 125 प्रति कनेक्शन प्रति माह
समाजवादी पार्टी 2013-14 11 घण्टे 15 मिनट 180 प्रति कनेक्शन प्रति माह
समाजवादी पार्टी 2016-17 16 घण्टे 180 से 200 प्रति किलोवाट प्रति माह
भारतीय जनता पार्टी 2017-18 18 घण्टे 650 से 800 प्रति किलोवाट प्रति माह प्र्रस्तावित
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले अलग अलग 5 सालों में 3 पार्टी की सरकारों द्वारा विद्युत आपूर्ति के आधार पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये आयोग से क्या दरें अनुमोदित करायी गयी और वर्तमान सरकार द्वारा प्रस्तावित की गयी उसके आंकडे स्वतः सिद्ध कर रहे हैं कि विद्युत आपूर्ति को आधार बनाकर गाॅंव की जनता पर बडा बोझ प्रस्तावित करना पूरी तरह गलत है। पूर्व में गाॅंव की जनता को 14 घण्टे तक विद्युत आपूर्ति मिल चुकी है। ऐसे में 18 घण्टे विद्युत आपूर्ति के नाम पर 260 से 350 प्रतिशत की वृद्धि किसी भी प्रकार उचित प्रतीत नही होती। गाॅंव की जनता पहले प्रति कनेक्शन के हिसाब से बिजली का बिल देती थी उसे प्रति किलोवाट कराकर उस पर पहले से ही बडा बोझ डाला गया है।
उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से पुनः एक बार अपनी मांग दोहराते हुए मांग करता है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में की गयी व्यापक वृद्धि को जनहित में वापस लिया जाये और साथ ही मुख्यमंत्री महोदय से यह भी निवेदन है कि गाॅंव के किसानों की भी दरों में भी लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है उसे भी जनहित में वापस लाना बहुत ही जरूरी है अन्यथा की स्थिति में गाॅंव की जनता व किसानों को तबाह होने से कोई नही रोक पायेगा।







