संस्मरण: अनुराग प्रकाश
बात 2017 की है मैंने कुछ नेस्ट बॉक्स लखनऊ में अपने घर के सामने स्तिथ पार्क में पेडों पर लगवाए थे।
उसी दौरान कॉलोनी के बच्चो को प्रकृति का महत्व बताते हुए पार्क में कुछ पेड़ भी बच्चों से लगवाए थे और बच्चो को चिड़ियों का महत्व बताते हुए उन्हें दाना पानी रखने की भी मुहिम भी चलाई थी।
नेस्ट बॉक्स में पिछले सालों में रोबिन, मार्टिन, गौरैया एवम गिलहरियों ने अपना घर बनाया किन्तु कुछ समय बाद एक नेस्ट बॉक्स का ऊपर का हिस्सा, आंधी में निकल गया। मैं सोच रहा था कि किसी दिन कोई दूसरी लकड़ी उसके ऊपर से लगा दूंगा जिससे नेस्ट बॉक्स में चिड़िया अपना घर फिर से बना सकें ।
किन्तु व्यस्तता के चलते समय नही मिल पाया। एक दिन सुबह मैं कमरे में बैठा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था और बच्चे अपने स्कूल की तैयारी कर रहे थे। तभी मेरा लड़का अश्विन कैमरा लेकर मेरे पास आया और बोला: पापा सामने पेड़ पे अभी उल्लू बैठा था। ये देखो मैंने उसकी फोटो खेंची हैं। मैने उत्सुकतावश तुरंत कैमरा देखा और देखते ही मेरी खुशी का ठिकाना न रहा । उस टूटे नेस्ट बॉक्स को एक स्कूप आउल ने अपना आशियाना बना लिया था।

अब बच्चे रोज़ सुबह उसकी हरकतों को देखते है और उन्हें कैमरे में कैद करते है । और लगता था वो भी हम लोगो को पहचान चुका था और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए हुए आराम से बैठा रहता ।
अपने पसन्दीदा पक्षी को अपने लगाए नेस्ट बॉक्स में रहते देखने का आनंद शब्दो मे बयां नही किया जा सकता।
अभी तक हम लोगो ने सिर्फ एक ही उल्लू को नेस्ट बॉक्स के आस पास देखा था। लेकिन जब एक दिन मैंने आफिस से घर पर फ़ोन किया तो बच्चो ने एक बड़ी खुशखबरी सुनाई की पापा पेड़ पर 2 उल्लू और उनके 3 बच्चे भी है।
शाम को ऑफिस से आते ही मैंने पेड़ पर खोज बीन शुरू की तो देखा उल्लू एवम उसके बच्चे पत्तों की ओट में बैठे है। उल्लू के छोटे फरबॉल जैसे बच्चों को देखकर बहुत अच्छा लगा। बच्चे तो उन्हें लगातार देख रहे थे और बॉलकोनी से हटने का नाम ही नही ले रहे थे।







