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    Home»इंडिया

    खेल प्रतिभाओं को तराशेगी मेजर ध्यानचन्द स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी

    ShagunBy ShagunJanuary 3, 2022Updated:January 3, 2022 इंडिया No Comments9 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया व फिट इंडिया अभियान शुरू किया था। यह युवाओं के समग्र विकास में सहायक हो रहा है। नई शिक्षा नीति में भी ऐसी गतिविधियों को उचित स्थान दिया गया। इस क्रम में नरेंद्र मोदी द्वारा मेरठ में मेजर ध्यानचन्द स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया। मेजर ध्यानचन्द स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में खेलों के विश्वस्तरीय शिक्षण एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। संस्थान में विश्वस्तरीय अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाएगा। खेल,खेल विज्ञान तथा खेल प्रौद्योगिकी के विभिन्न पाठ्यक्रमों के साथ प्रशिक्षण एवं शोध कार्य संचालित किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय सात सौ करोड़ रुपए की लागत से लगभग बानवे एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा। खेलो इंडिया अभियान के अंतर्गत खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसका सकारात्मक परिणाम हुआ।

    टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता इसका प्रमाण है। खेलो इंडिया अभियान से भी देश व उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल रही है। खेलो इण्डिया अभियान को गांव गांव तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गांव गांव में स्टेडियम,ओपन जिम, व्यायामशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। खेल की गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों का गठन किया गया है। विगत साढ़े चार वर्षों के दौरान मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट भी उपलब्ध करायी गई हैं। इससे गांवों में खेल के प्रति एक नई अभिरुचि जागृत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ओपेन जिम का निर्माण इस दिशा में एक अच्छा प्रयास है।

    देश में खेलों को बढावा देने और नई प्रतिभाओं को तलाशने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा राजीव गांधी खेल योजना,शहरी खेल संरचना योजना और प्रतिभा खोज योजना को मिलाकर इनके स्थान पर खेलो इंडिया योजना पेश की गई थी। इस खेल कार्यक्रम को व्यक्तिगत विकास,सामुदायिक विकास,आर्थिक विकास और राष्ट्रीय विकास के लिए एक उपकरण के रूप में स्थापित किया गया है। इसमें अखिल भारत स्तरीय स्पोर्ट छात्रवृत्ति योजना भी शामिल है। इस योजना के तहत चुने गए हर एथलीट को सलाना तौर पर पांच लाख रुपये की छात्रवृत्ति आठ साल तक लगातार मिलेगी। बीस करोड़ बच्चों को राष्ट्रीय शारीरिक फिटनेस अभियान में शामिल किया गया।

    खेलो इंडिया कार्यक्रम योजना के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एथलेटिक्स ट्रैक, हॉकी और फुटबॉल ग्राउंड,तरणताल सहित बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। सरकार ने खेलो इंडिया योजना को 2025- 26 तक के लिये बढ़ा दिया है। भारत ने टोक्यो में कुल सात पदक जीते। भारत सन 1900 से ओलंपिक में हिस्सा ले रहा है। इसके बाद से पहली बार है जब टीम ने एक ओलंपिक में सबसे ज्यादा पदक जीते हैं। आठ साल बाद कुश्ती में दो पदक जीते। तेरह साल बाद ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। 121 साल में पहली बार किसी भारतीय ने एथलेटिक्स में पदक जीता है। वह ब्रिटिश शासन का दौर था। इसी प्रकार किसानों की आय दोगुनी करने का अभियान चलाया जा रहा है।

    भारत में प्राचीन काल से कृषि व पशुपालन परस्पर पूरक रहे है। यह भारत की समृद्ध अर्थव्यस्था के आधार थे। जैविक अथवा प्राकृतिक कृषि से लागत कम आती थी। इसके अनुरूप लाभ अधिक होता था। ऐसे कृषि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए भी लाभ दायक थे। जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बनी रहती थी। किंतु कुछ दशक पहले केमिकल खाद का प्रचलन शुरू हुआ। उत्पादन बढा। लेकिन इससे अनेक समस्याएं भी पैदा हुई। मानव सवास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा। जमीन की उपजाऊ क्षमता कम होने लगी। कृषि की लागत बढ़ने लगी। पशुपालन की ओर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब यह समस्याएं जन जीवन को प्रभावित करने लगी है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस ओर ध्यान दिया। इस क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता थी। कृषि क्षेत्र में परिवर्तन अपेक्षित थे। लेकिन यह कार्य केवल सरकार के स्तर पर संभव नहीं था। किसानों का भी जागरूक होना आवश्यक था।

    नरेंद्र मोदी सरकार ने यूरिया की कालाबाजारी रोकी। नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन शुरू किया गया। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया। इसी के साथ प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने का अभियान भी शुरू किया गया। बड़ी संख्या में किसान अब प्राकृतिक कृषि के प्रति आकर्षित हो रहे है। मोदी सरकार किसानों की आय दो गुनी करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसमें जैविक कृषि भी उपयोगी साबित हो रही है। विगत साथ वर्षों के दौरान किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए है। प्राकृतिक कृषि से देश के अस्सी प्रतिशत किसानों को सर्वाधिक लाभ होगा। इनमें दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसान हैं। केमिकल फर्टिलाइजर से इन किसानों की कृषि लागत बहुत बढ़ जाती है। प्राकृतिक खेती से इनकी आय बढ़ेगी।

    केमिकल के बिना भी बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है। पहले केमिकल नहीं होते थे, लेकिन फसल अच्छी होती थी। विगत सात वर्षों में बढ़िया बीज कृषि उत्पाद हेतु बाजार के प्रबंध किए गए। मृदा परीक्षण,किसान सम्मान निधि,डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य,सिंचाई के सशक्त नेटवर्क,किसान रेल जैसे अनेक कदम उठाए गए है। प्रधानमंत्री ने प्राचीन भारतीय पारम्परिक और प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बड़ा अभियान शुरू किया है।

    बता दें कि कुछ दिन पहले नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से प्राकृतिक खेती राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को सम्बोधित किया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास से वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। यह सम्मेलन आणंद गुजरात में आयोजित किया गया था। इसके बाद किसान दिवस पर लखनऊ व काशी में किसान हित के कार्यक्रम आयोजित हुए। लखनऊ के कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। जबकि काशी के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ दोनों सहभागी थे। इन सभी कार्यक्रमों में किसानों के कल्याण संबन्धी अभियान को आगे बढ़ाया गया। प्राकृतिक कृषि पर बल दिया गया।

    वर्चुअल सम्मेलन में आठ करोड़ से अधिक किसान तकनीकी माध्यम से जुड़े थे। इसमें नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर आधारित यह सम्मेलन कृषि के विभिन्न आयाम, फूड प्रोसेसिंग,नैचुरल फार्मिंग इत्यादि विषय पर वर्तमान सदी में भारतीय कृषि का कायाकल्प करने में सहायक सिद्ध होगा। प्राकृतिक खेती के प्राचीन ज्ञान से सीखने की आवश्यकता है। प्राचीन ज्ञान पर आधुनिक वैज्ञानिक शोध किये जा सकते है। प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने बनाने की आवश्यकता है। अमृत महोत्सव वर्ष में हर पंचायत का कम से कम एक गांव को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास चल रहा है। प्रधानमंत्री ने काशी में कहा कि हमारे लिए गाय माता है। पूज्यनीय है।

    गाय, भैंस का मजाक उड़ाने वाले भूल जाते हैं कि देश के आठ करोड़ परिवारों की आजीविका पशुधन से चलती है। इनकी मेहनत से भारत हर साल लगभग साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये का दूध उत्पादन करता है। यह धनराशि भारत में गेहूं और धान की कीमत से अधिक है। इसलिए डेयरी सेक्टर को मजबूत करना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है। डेयरी सेक्टर देश मे रोजगार का बड़ा माध्यम रहा है। इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए हमारी सरकार ने कामधेनु आयोग का गठन किया। डेयरी सेक्टर के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए विशेष फण्ड बनाया गया। पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ा गया। पशुओं हेतु अच्छी गुणवत्ता का चारा सुलभ कराने के लिए काम चल रहा है। घर पर पशुओं का इलाज और गर्भाधान के लिए विशेष अभियान चलाया गया। हमारी सरकार बच्चों के टीकाकरण तथा कोरोना टीकाकरण,पशुओं में खुरपका,मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए पशुओं के टीकाकरण का राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है। विगत सात वर्ष के दौरान दुग्ध उत्पादन में करीब पैंतालीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान भारत दुनिया का लगभग बाइस प्रतिशत दूध उत्पादन करता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला राज्य होने के साथ ही डेयरी सेक्टर के विकास में भी बहुत आगे है। यह सेक्टर देश के दस करोड़ से अधिक छोटे किसानों की अतिरिक्त आय का साधन बन सकता है।

    पशुधन,बायो गैस, जैविक खेती,प्राकृतिक खेती का आधार बन सकता है। एक समय भारत में प्राकृतिक खेती होती थी। प्राकृतिक खेती में बाहरी मिलावट नहीं होती थी। खाद व कीटनाशक सभी प्राकृतिक होते थे।पुनः प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ना होगा। यह समय की मांग है। सरकार इसके लिए अभियान चला रही है। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर यह अभियान आगे बढ़ेगा। इसमें खर्च कम,उत्पादन अधिक है। आज के विश्व में प्राकृतिक खेती से पैदा फसलों की कीमत अधिक है। यह हमारे कृषि सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने,उनको अवैध कब्जे से चिंता मुक्त करने व स्वामित्व योजना में उत्तर प्रदेश अग्रणी है। योगी आदित्यनाथ कहा कि स्वॉयल हेल्थ कार्ड,प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, खेती सिंचाई में विविधीकरण करने के साथ तकनीक का उपयोग से किसानों की लाभ मिल रहा है। देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करीब पांच दशक पहले हुई थी। लेकिन ईमानदारी के साथ किसान को इसके साथ जोड़ने का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है। उनकी सरकार ने लागत के डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागू करने का कार्य किया।

    वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के तुरन्त बाद छियासी लाख किसानों के छत्तीस हजार करोड़ रुपये के फसली ऋण को माफ करके उन्हें राहत देने का कार्य किया। विगत साढ़े चार वर्ष के दौरान वर्तमान सरकार ने प्रदेश में अनेक लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का कार्य किया गया। जिससे बाइस लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित हुई है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालने के बाद प्रोक्योरमेन्ट पॉलिसी के माध्यम से प्रदेश के किसानों से सीधे खरीदने की व्यवस्था की। पूर्ववर्ती सरकारों में आढ़तियों के माध्यम से खरीद की जाती थी। जिससे किसानों का शोषण होता था। पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में आढ़तियों के माध्यम से करीब एक सौ तेईस लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी।

    वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सीधे किसानों से दो सौ तीस लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई। इसी तरह पिछली सरकार में करीब चौरानवे लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। वर्तमान प्रदेश सरकार ने करीब दो सौ उन्नीस लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की। एमएसपी का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में देने का कार्य किया गया है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने किसानों को आलू का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य देकर लाभान्वित किया है। दलहन,तिलहन एवं अन्य फसलों के उचित दाम भी किसानों को प्रदेश सरकार ने देने का कार्य किया है।

    व्यापक संशोधन कर कृषि मंडियों को किसान हितैषी बनाने का कार्य किया। दस वर्षों से लम्बित गन्ना मूल्य का भुगतान किया। अब तक लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की धरती में गाय को सनातन काल से ऋषि व कृषि परम्परा के साथ जोड़ा गया है। हमारी आस्था का यह प्रतीक होने के अलावा कृषि आधारित व्यवस्था की आधारभूत इकाई एवं नींव भी है।

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