- उपभोक्ता परिषद ने पूछा इसमें शामिल अभियंताओं पर क्यों नहीं हुयी कार्यवाही ?
- 25000 करोड के स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मामले में अब बरती जाएगी पूरी सावधानी
लखनऊ, 22 दिसम्बर: उपभोक्ता परिषद ने कहा पूरे प्रदेश में एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड को आज से लगभग चार वर्ष पूर्व 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य ओपेक्स मॉडल पर दिया गया था जिसमें से एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड ने लगभग 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाए इसके बाद से ही कभी भार जंपिंग कभी मीटर रीडिंग जंपिंग कभी एका एक लाखों विद्युत उपभोक्ताओं की बत्ती गुल होने का प्रकरण सामने आया एस0टी0एफ जांच हुई, अंततः किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामले को दबा दिया गया।
उपभोक्ता परिषद की दर्जनों शिकायतों पर तत्कालीन ऊर्जा मंत्री ने जांच के निर्देश दिए। उपभोक्ता परिषद ने बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर खरीद से लेकर उसमें आ रही कमियों पर सवाल उठाया, लेकिन बिजली कंपनियों और पावर कारपोरेशन में बैठे कुछ अभियंता लगातार स्मार्ट मीटर की कमियों को दबाते रहे और उसकी तारीफ में लगे रहे।
उपभोक्ता परिषद का दावा है कि अब पावर कारपोरेशन ने स्वत माना है कि स्मार्ट मीटर में बडे पैमाने पर कमियां हैं व समस्याएं हैं जिस पर ध्यान दिया जाए जिससे आने वाले समय में जो 25000 करोड के स्मार्ट प्रीपेड मीटर के टेंडर कंपनियों को दिए गए हैं उसमें यह दिक्कतें न आए। पावर कारपोरेशन के निदेशक कमर्शियल की तरफ से सभी बिजली कंपनियों को कमियों को गिनाते हुए आगे सुधार की बात की जा रही है।
उपभोक्ता परिषद ने कहा प्रदेश के अनेकों जनपदों में लगे इन पुरानी तकनीकी के समस्याओं वाले 12 लाख स्मार्ट मीटर को बिजली कंपनियां कब बदलेगी और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के खिलाफ कठोर कदम कब उठाएंगे।
सभी भ्रष्ट अभियंताओं के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई: अवधेश कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जब उपभोक्ता परिषद द्वारा पूर्व में उठाए गए सभी सवाल सत्य पाए गए तो ऐसे में स्मार्ट मीटर खरीद में और उसकी देखरेख में लगे सभी अभियंताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाना चाहिए कुछ तो अभियंता आज निदेशक बनकर बैठे हैं जो स्मार्ट मीटर के तारीफ में गाने गाते थे जब अब पावर कारपोरेशन ने स्वत माना कि इसमें बहुत कमियां है पावर कॉरपोरेशन द्वारा जिन कर्मियों को इंगित किया गया है उसमें प्रमुख रूप से पुरानी तकनीकी के 2 जी 3जी में आ रही नेटवर्क की प्रॉब्लम नो डिस्प्ले की प्रॉब्लम कनेक्शन काटने व जुडने में आ रही दिक्कतें स्मार्ट मीटर द्वारा भार जंपिंग बिजली चमकने पर मीटर का बंद होना रीडिंग रिसैटिंग होना नैरो लेन बेसमेंट ग्रीन जोन आउट स्कर्ट एरिया कैंटोनमेंट एरिया में नेटवर्क का काम न करना अर्थात पुरानी तकनीकी जीरो नेटवर्क पर चला जाना कम्युनिकेशन का गायब होना बहुत ही आसानी से स्मार्ट मीटर में शंट लगाकर चोरी करना सहित अनेकों व तकनीक कमियां उजागर की कई है जिससे सिद्ध हो रहा है कि यह स्मार्ट मीटर फेल है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अभी भी समय है प्रदेश की बिजली कंपनियों को 4जी तकनीकी के स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खरीद को रोकते हुए लेटेस्ट तकनीकी अथवा 5जी तकनीकी के स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खरीद करना चाहिए अन्यथा की स्थिति में आने वाले समय में कम्युनिकेशन की प्रॉब्लम इनमें भी आएगी और उसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पडेगा।







