करवाचौथ का व्रत पत्नी अपने पति के प्रति प्यार, स्नेह, आत्मसमर्पण और दीर्घायु के लिए रखती है एक पत्निव्रता स्त्री इस दिन सुबह से लेकर शाम तक निर्जल इस उपवास को रखती है और रात्रि के समय चन्द्रमां के समाने अपने पति को जल पिलाकर उसकी लम्बी आयु की कामना करने के पश्चात ही अपना व्रत पति के हाथों खोलती है।
ये दिन शादीशुदा स्त्रियों के लिए अत्याधिक शुभ माना जाता है लेकिन कभी-कभी कुछ जोड़े करवाचौथ की सही विधि को समझ नहीं पाते और कई ऐसी गलतियां अनजाने में कर बैठते है जो उनके वैवाहिक जीवन में कलह होने की वजह बन जाती है।
कौन सी वो गलतियां है जो भूल से भी पूजा के दौरान नहीं करनी है।
- केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया है, ऐसी महिलाएं ही ये व्रत रख सकती हैं।
- यह व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाएगा, निर्जल या केवल जल पर ही व्रत रखें।
- व्रत रखने वाली कोई भी महिला काला या सफेद वस्त्र न पहने।
- लाल वस्त्र सबसे अच्छा है, पीला भी पहना जा सकता है।
- आज के दिन पूर्ण श्रृंगार और पूर्ण भोजन जरूर करना चाहिए।
- अगर कोई महिला अस्वस्थ है तो उसके स्थान पर उसके पति यह व्रत कर सकते हैं।







