- उपभोक्ता परिषद ने डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट पर उठाए सवाल कहा जहां पर 75 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनियों ने 3 से 6 लाख में स्टॉल खरीद कर अपनी तकनीकी को बता रहे उच्च स्तर की वह फील्ड में आते ही क्यों साबित हो जाते हैं फेल
- डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट से आम जनता उपभोक्ता किसान नदारद उपभोक्ता परिषद का दावा केवल देश के 90 प्रतिशत निजी घराने और देश के अनेकों राज्यों के बिजली विभाग के मुखिया कर रहे हैं आपस में सुधार की बात
लखनऊ 14 नवंबर : इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम की तरफ से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आठवीं डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 जो 5 सितारा होटल में आयोजित की गई जिसका होस्ट पावर कॉरपोरेशन था जिसमें जिसमें देश की 75 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनियों ने भाग लिया और अपने स्टाल लगाए निश्चित ही आयोजन में करोडों खर्च हो रहा है यहां पर जो स्टार लगे हैं वह दो प्रकार के हैं छोटे स्टाल स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनियों ने 3 लाख में और बडे स्टॉल 6 लाख में 2 दिन के लिए बुक कराया है
राजधानी लखनऊ में एक फाइव स्टार सेंट्रम होटल में आयोजित इस मीट में ज्यादातर देश के स्मार्ट मीटर प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनी बढ-चढकर भाग ले रहे हैं इसका आयोजन 2 दिन तक चलेगा।

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनियां इस मीट के माध्यम से क्या कोई ऐसा माहौल स्थापित करना चाहती है जिसमें उनके घटिया मीटर भी आसानी से उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं के परिसर पर लग जाए लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है उपभोक्ता परिषद ने मीट के आयोजन पर बडा सवाल उठाते हुए कहा इस मीट में देश के अनेकों राज्यों के डिस्काम के मुखिया भाग ले रहे हैं देश के निजी घराने भाग ले रहे हैं और जिसमें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सहित उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने भी भाग लिया और विद्युत नियामक आयोग सहित पावर कॉरपोरेशन के मुखिया ने भी भाग लिया सबने अपने-अपने स्तर से सुधार की बातें की लेकिन उपभोक्ताओं के मन मे भ्रम पैदा होना स्वाभाविक है क्योंकि इस पूरी मीट से प्रदेश का उपभोक्ता किसान आम जनता नदारत रहे।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कॉरपोरेशन व कोई देश का निजी घराना कोई भी मीट आयोजित करें उस पर करोड़ो खर्च करें उसे उपभोक्ताओं को कोई लेना-देना नहीं है लेकिन उसके खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं के टैरिफ से नहीं होनी चाहिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर की क्वालिटी अच्छी है तो स्वागत है लेकिन अगर घटिया क्वालिटी माहौल बनाकर उपभोक्ताओं के परिसर पर लगाने की योजना है तो वह कतई उत्तर प्रदेश में सफल नहीं होने वाली है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले केंद्रीय पावर सेक्टर के उच्च अधिकारियों व ऊर्जा मंत्री को यह बात स्पष्ट करना चाहिए कि जब विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का अधिकार वैकल्पिक है तो सभी उपभोक्ताओं के यहां अनिवार्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का माहौल क्यों बनाया जा रहा है इसके पहले एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश में 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का भारी भरकम ठेका लिया लेकिन आधे रास्ते से वह गायब क्यों हो गई ?
उत्तर प्रदेश में पुरानी तकनीकी के 12 लाख स्मार्ट मीटर का खामियाजा आज भी प्रदेश के उपभोक्ता भुगत रहे हैं उस पर आज इस मीट में कोई बात नहीं हुई कि इसकी तकनीकी को अपग्रेड किया जाए केवल देश के निजी घराना को बढावा देकर ऊर्जा सेक्टर का उद्धार बिल्कुल नहीं हो सकता यह बात बिजली कंपनियों का डिस्काउंट को समझना होगा।







