उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव पारित, रखे गए अवधी भाषा अनुवादक, अवध भारती संस्थान हैदरगढ़ के अध्यक्ष डॉ राम बहादुर मिसिर का प्रयास सार्थक, मिल रही हैं बधाईयाँ
बाराबंकी: प्रदेश में अवध भारती संस्थान के संस्थापक अवधी भाषा को लोकभाषा की मान्यता के लिए भगीरथी प्रयास करने वाले डॉ राम बहादुर मिसिर का प्रयास सार्थक हो गया। मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधानसभा की कार्यवाही हिंदी अंग्रेजी के साथ ही चार और भाषाएं अवधी, भोजपुरी बृज और बुंदेली लोक भाषाओं में लिखी जाएगी जिसके लिए सदन में प्रस्ताव पारित हो गया।

इसी के साथ ही प्रदेश में अवधी, बृज, भोजपुरी एवं बुंदेली लोक भाषाएं सरकारी लिखापढ़ी की भाषा होने की मान्यता मिल गई। विधानसभा में अवधी भाषा अनुवादक भी रखे जा चुके हैं। विधानसभा में अवधी भाषा मे कार्यवाही लिखने के लिए प्रस्ताव पारित कराने के लिए अवधी भाषा साहित्य प्रेमियों द्वारा जहाँ प्रदेश सरकार के प्रति आभार जताया जा रहा है, वहीं इसके लिए भागीरथी प्रयास करने वाले डॉ राम बहादुर मिसिर को बधाईयाँ मिल रही हैं।
डॉ राम बहादुर मिसिर ने प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अवधी भाषा गांव गरीब की जनभाषा है, इसे लोकभाषा की मान्यता दिए जाने से हम सभी गौरवान्वित हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को हम धन्यवाद देते हैं। अवधी भाषा साहित्यकार डॉ अर्जुन पांडेय, कवि अजय प्रधान, प्रदीप महाजन, समाजसेवी रत्नेश कुमार, अनिल श्रीवास्तव लल्लू सहित दर्जनों साहित्यकारों ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।








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