नयी दिल्ली, 16 अक्तूबर : नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा कराये गये 500 और 1,000 रपये के पुराने नोटों की गिनती के लिये 66 अत्याधुनिक मुद्रा गणना एवं प्रसंस्करण मशीनों (सीवीपीएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी।
नोटों की गिनती के लिये इन आधुनिक मशीनों की खरीद के लिये वैश्विक निविदा जारी की गई थी। केन्द्रीय बैंक ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत इस संबंध में की गई पूछताछ के जवाब में यह जानकारी दी। पीटीआई संवाददाता द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा, इस समय पुराने नोटों की गिनती के लिये 59 आधुनिक गणना मशीनें काम पर लगी हुई हैं। इसके अलावा वाणिज्यक बैंकों के पास उपलब्ध सात ऐसी मशीनों को भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है।
केन्द्रीय बैंक ने कहा कि सात सीवीपीएस मशीनों को पट्टे पर लेने का काम चल रहा है, इसके साथ ही वाणिज्यिक बैंकों के पास उपलब्ध सात मशीनों को भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है। इन मशीनों को पट्टे पर लेने के शुल्क के बारे में पूछे गये सवाल पर केन्द्रीय बैंक ने कहा कि जो सूचना मांगी गई है वह वाणिज्यिक विश्वास के रूप में है और इसलिये सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून 2005 की धारा 8..एक..डी के तहत इस तरह की जानकारी देने से छूट है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसके कार्यालयों में 59 सीवीपीएस मशीनें इस्तेमाल में लाई जा रही हैं और एक निरीक्षक की निगरानी में पांच लोगों का समूह इसका संचालन कर रहा है। इसके अलावा कई अन्य लोग भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं।
रिजर्वबैंक ने 2016-17 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि पुराने बंद किये गये 500, 1,000 रपये के 15.28 लाख करोड रपये यानी 99 प्रतिशत नोट बैंक्रिग तंत्र में लौट आए हैं। बैंक ने कहा कि 15.44 लाख करोड रपये के पुराने नोटों में से केवल 16,050 करोड रूपए के ऐसे नोट ही बैंकिंग तंत्र में नहीं आये हैं। रिजर्व बैंक की यह रिपोर्ट 30 जून 2017 को समाप्त वर्ष की है।







